गुरुवार, 26 मार्च 2009

कमलनाथ की राह हुई आसान

कमलनाथ की राह हुई आसान

भोपाल [ऋषि पांडे]। कांग्रेस के हाई प्रोफाइल नेता कमलनाथ के खिलाफ भाजपा ने मारोतीराव खबसे को उम्मीदवारी दे कर उनकी राह आसान कर दी है।

राजनीतिक पंडितों के पल्ले यह नहीं पड़ रहा कि कहां टीवी स्टार स्मृति ईरानी, मध्य प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नामों की चर्चा और कहां खबसे जैसे लो प्रोफाइल और स्थानीय नेता का चयन। खबसे का एक मात्र परिचय यह है कि वह छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत एक विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक रह चुके हैं।

कमलनाथ जैसे शक्तिशाली नेता के मुकाबले उम्मीदवार चयन करते वक्त भाजपा ने न तो जातिगत और न ही राजनीतिक पकड़ की कसौटी का ध्यान रखा। पिछले तीन लोकसभा चुनावों में यह जानते हुए कि नाथ को हरा पाना टेढ़ी खीर है।

भाजपा ने उनके मुकाबले ऐसे उम्मीदवार जरूर दिए थे कि वे क्षेत्र में ही उलझ कर रह जाएं। दो बार सुंदरलाल पटवा और एक बार प्रहलाद पटेल ने उन्हें टक्कर दी थी। पटवा के हाथों तो नाथ को एक बार पराजय का भी सामना करना पड़ा था। इस बार उम्मीदवारों के पैनल में खबसे का नाम दूर-दूर तक नहीं था। विजयवर्गीय ने तो खुद चुनाव लड़ने की पेशकश की थी।

एक अन्य मंत्री गौरीशंक र बिसेन के भी छिंदवाड़ा से लड़ने की चर्चा थी, पर चुनाव आयोग द्वारा पत्रकारों को तोहफे बांटने के मामले में उनकी भ‌र्त्सना करने के बाद पार्टी ने उनके नाम पर विचार करना छोड़ दिया।

नाथ की नजर भी भाजपा उम्मीदवार की घोषणा पर टिकी हुई थी। उनके कैंप को भय लगा कि इस बार भी कहीं प्रहलाद पटेल मुकाबले में न आ जाएं। पटेल ने पिछली बार नाथ की जीत की अंतर 188928 से घटा कर महज 63000 पर ला दिया था।

हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा की स्थिति काफी अच्छी थी। चार पर तो वह विजयी रही थी।

पूरे संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस को मिले मतों के अंतर को देखें तो कांग्रेस के मुकाबले भाजपा साढ़े तीन हजार मत आगे थी। इसलिए कमलनाथ कैंप को चिंता थी कि यदि भाजपा ने कोई मजबूत उम्मीदवार दे दिया तो मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_5339455/

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट


ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

केंद्रीय उद्योग मंत्री कमल नाथ के चुनाव क्षेत्र छिंदवाड़ा में पिछले दो दशक से कमल ही जीतता आ रहा है। कभी यह कमल कमल 'नाथ' के रूप में तो फिर कभी कमल के 'फूल' के रूप में।

अब भाजपा ने छिंदवाड़ा के विधायक मारोतराव खवसे को मुकाबले में उतारा है जो एक बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसके पहले कमलनाथ को टक्कर देने के लिए दो बार सुंदरलाल पटवा और एक बार प्रहलाद पटेल को मैदान में उतारा था। कमलनाथ एक बार पटवा से हार भी चुके हैं।

प्रह्लाद पटेल ने पिछले चुनाव में अंतर 188928 से घटा कर महज 63000 पर ला दिया था और अगर प्रह्लाद पटेल बाजपा से लड़ते तो वे कमलनाथ को अच्ची टक्कर दे सकते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इसमें भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले लगभग चार हजार मत ज्यादा मिले थे।

ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

सोमवार, 9 मार्च 2009

आकाशवाणी छिन्दवाड़ा : धर्म टेकड़ी के माथे पर जैसे मुकुट


आकाशवाणी छिन्दवाड़ा का 7 मार्च को स्थापना दिवस होता है। बाबा की डायरी में उन यादों को बखूबी संजोया गया है, जब रेडियो स्टेशन का शुभांरभ होने वाला था। इसका शुभांरभ 7 मार्च, 1992 को तत्कालीन पर्यावरण राज्य मंत्री कमलनाथ जी ने किया था।

बाबा की डायरी से -
दिनांक 6-3-92

गिरीश वर्मा ने आज भोपाल के लिये एक इंटरव्यू लिया। आकाशवाणी परिसर पहली दफा देखा। काफी विशाल क्षेत्र में निर्माण कार्य हुआ है। धर्म टेकड़ी के माथे पर जैसे मुकुट। नीचे के चारों दिशाओं में दृष्टि गोचर होने वाले दृश्य बड़े रमणीय लगे। कभी डोंगरगढ़ की बोमलाई मंदिर में जाने का अवसर मिला था, कुछ कुछ इसकी छबि आज अनायास छिन्दवाड़ा में देखने को मिली।

क्या कारण है कि हम जितना ऊपर से देखें नीचे की सुन्दरता बढ़ती जाती है शायद इसलिये कि जो हमसे दूर होता जाता है वह अधिक प्रिय बनता है। यही प्रेम और प्रीत फिर सौंदर्य में बदल जाती होगी। ऊंचाई पर खड़े होकर सब कुछ सुंदर हो जाता है और जब सब कुछ सुंदर लगने लगे तो समझिये आदमी का मन और उसकी आत्मा किसी फरिश्ते के श्वेत पंख बांध कर स्वर्ग में सैर करने लगती है। सौंदर्य की पवन का अहसास होते ही हम किसी आत्मिक आनंद की नीली झील में कमल पुष्प के समान हिलोरे लेने लगते हैं।

पहाड़ों पर रहने वाले, हिमालय की तराई और काश्मीर जैसे स्थानों पर निवास करने वाली वहां की अमीर गरीब जनता में शायद इसी कारण हम लोगों से अधिक मस्ती, उत्साह और साफ-गोई होती है। पहाड़ों पर बसने वाले आदिवासी अनपढ़ गंवार तो अपनी सादगी और ईमानदारी के लिये मशहूर है ही। दुनिया की हर जगह देखा गया है कि मंदिर, चर्च और दूसरे धार्मिक स्थल अक्सर ऊंचाई पर बने है। जैन, बौध्द और हिन्दू पूजा स्थल पहाड़ों पर अधिक है। अपने आराध्य से मिलने के लिये आनंद की गंगा में स्नान आवश्यक है। आंतरिक उत्स की भेंट ही पहली शर्त है, जिसको प्रियतम की देहरी पर अर्पित किया जा सकता है।

आज पहली मर्तबा देख पाया कि छिन्दवाड़ा नगर उसके चारों ओर का दृश्य कितना सुन्दर है। आधुनिक यंत्रों से सुसज्जित इमारतें तो अभी पूरी तरह से खुल भी नहीं पाई हैं। आज रंग रोगन और सौंदयीर्करण समाप्त हो रहा है। कल सुबह 7 तारीख (7 मार्च, 1992) को 10.30 पर पर्यावरण राज्य मंत्री कमलनाथ जी इसका शुभांरभ कर रहे हैं। मुख्य समारोह स्टेडियम में होगा।

अपना इंटरव्यू रिकार्ड करा कर आ गया हूँ। साथ ही गोवर्धन यादव है, उनकी भी कविता भोपाल के लिये रिकार्ड की गई है। प्रेस आकर पता लगा कि नगरपालिका भवन में आज कुछ देर बाद मेरा सम्मान कमलनाथजी करने वाले है और वहां जाना है। इसके पूर्व कोई सूचना नहीं थी। आकाशवाणी वालों ने पहुंचा दिया। मनगटे, जलील, सलीम, राजेन्द्र राही सभी हैं।

सम्मान समारोह सतपुड़ा आंचलिक पत्रकार संघ के अधिवेशन अवसर पर किया गया। रवि दुबे, हलदुलकर, पांडे, रवि ज्वाला, शंकर साहू का भी सम्मान हुआ। थोड़े इंतजार के बाद कमलनाथजी पहुँच पाये। छ: जिलों से कोई दो सौ के करीब पत्रकार इकत्र हुये थे। समारोह के अंत में साकेत में डिनर था, मैं नहीं गया।

बाबा की डायरी से - दिनांक 6-3-92