गुरुवार, 26 मार्च 2009

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट

कमलनाथ को दहेज में मिली छिंदवाड़ा सीट


ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

केंद्रीय उद्योग मंत्री कमल नाथ के चुनाव क्षेत्र छिंदवाड़ा में पिछले दो दशक से कमल ही जीतता आ रहा है। कभी यह कमल कमल 'नाथ' के रूप में तो फिर कभी कमल के 'फूल' के रूप में।

अब भाजपा ने छिंदवाड़ा के विधायक मारोतराव खवसे को मुकाबले में उतारा है जो एक बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसके पहले कमलनाथ को टक्कर देने के लिए दो बार सुंदरलाल पटवा और एक बार प्रहलाद पटेल को मैदान में उतारा था। कमलनाथ एक बार पटवा से हार भी चुके हैं।

प्रह्लाद पटेल ने पिछले चुनाव में अंतर 188928 से घटा कर महज 63000 पर ला दिया था और अगर प्रह्लाद पटेल बाजपा से लड़ते तो वे कमलनाथ को अच्ची टक्कर दे सकते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इसमें भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले लगभग चार हजार मत ज्यादा मिले थे।

ऐसे कहा तो यह भी जाता है कि भाजपा ने कमलनाथ को यह सीट शुरु से ही दहेज में दे रखी है। कमलनाथ के श्वसुर किसी जमाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं और उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तक से अच्छे संबंध हैं। कमलनाथ दून स्कूल में राजीव गाँधी के साथ पढ़े हुए हैं और इन्दिराजी ने उन्हें अपना छोटा बेटा मानकर राजनीति में आने को कहा था।

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