शनिवार, 26 नवंबर 2011

पहली बार लिखा छिंदवाड़ा का प्रामाणिक इतिहास

सागर के युवा शोद्यार्थी डॉ. तरुण कुमार बड़ोनिया ने छिंदवाड़ावासियों को पहली बार उनके सही इतिहास से वाकिफ कराने का दावा किया है। उनके शोध में यह तथ्‍य उजागर हुआ है कि छिंदवाड़ा जिला सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए किसी आरोग्य तीर्थ से कम नहीं था। मध्यकाल से लेकर अंग्रेजी शासन काल के अंतिम वर्षों तक बुंदेलखंड के लोग विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने छिंदवाड़ा जाते रहे।

badonia सरकारी गजेटियर में भ्रामक जानकारी
इतिहास विद् प्रो. विवेकदत्त झा और प्रो. रहमान अली का मानना है कि मप्र शासन के गजेटियर में प्रकाशित की जा रही पुरातत्व संबंधी जानकारी पूरी तरह प्रमाणिक नहीं है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि गजेटियर में प्रकाशित है कि छिंदवाड़ा जिले में पाषाण युग के अवशेष नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि छिंदवाड़ा में चार पाषाण कालों के अवशेष मिले हैं। तरुण बडोनिया ने भी अपने शोधकार्य के दौरान इन अवशेषों पर अध्ययन किया है। गजेटियर प्रकाशित होने से पहले भी विभिन्न शोध कार्यों के दौरान छिंदवाड़ा में पाषाण युग के अवशेष मिलने का उल्लेख है। उज्जैन में विक्रम विवि के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रहमान अली का मानना है कि शासकीय स्तर पर होने वाले शोधों में पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही। इससे उन शोध कार्यों का स्तर लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि शोध कार्यों के संबंध में उल्लेखित तथ्यों के बारे में विशेषज्ञों के पास पूर्व से निर्धारित मानक होते हैं। जिनके आधार पर ही वे पूर्व के इतिहास से उन तथ्यों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा जिले के पाषाण पर तरुण बडोनिया के शोध कार्यों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं। जिन्हें पुराने मानकों के आधार पर इतिहास से जोड़ा जा रहा है। वहां सातवाहन वंश के ताम्र पत्र, मंदिर निर्माण व अभिलेख भी प्राप्त हुए हैं। छिंदवाड़ा के लिखरी, चौरई, नीलकंठी, राजे गांव, आदि क्षेत्रों में पुराने इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्‍य मौजूद हैं।

विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष डॉ. बीडी झा के मार्गदर्शन में डॉ. बड़ोनिया ने छिंदवाड़ा के 10 वीं शताब्दी से लेकर अंग्रेजी शासन काल तक यहां के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनैतिक घटनाक्रमों का लेखा जोखा तैयार किया है। यह पहला अवसर है जब इस काम को वास्‍तवकि जांच पड़ताल के बाद तथ्‍यों के आधार पर किया गया।

डॉ बड़ोनिया के मुताबिक छिंदवाड़ा का राजनैतिक इतिहास मौर्य काल से शुरू हुआ। खास बात यह रही कि इस जिले के तत्कालीन सीमा पर बसे अन्य जिलों सिवनी, जबलपुर, नागपुर आदि का राजनैतिक उद्भव उतनी तेजी से नहीं हुआ, जितना छिंदवाड़ा का। शोध में यह निष्कर्ष निकला है कि छिंदवाड़ा का सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव दक्षिण भारतीय प्रदेशों व विदेशों से प्रदेश के बाकी जिलों की अपेक्षा बहुत पहले हो गया था। प्रमाणस्वरूप यहां दक्षिण के हिंदसासानी शासक, प्रवरसेन द्वितीय के जमाने के कई सिक्के, ताम्रपत्र, शिलालेख और हाथी दांत से बने आभूषण और सामग्री के खरीद फरोख्त संबंधी प्रमाण मिले हैं।

मध्यकाल व उससे पहले तक बुंदेलखंड के निवासियों के बीच छिंदवाड़ा आरोग्य स्थल के रूप में पहचाना जाता था। यहां आज भी मौजूद गरम पानी का झरना और उससे पहले यहां की विभिन्न जड़ी-बूटियां लोगों को यहां आने के लिए मजबूर करती थी। जो लोग औषधीय उपचार में विश्वास नहीं रखते थे वे यहां तंत्र-मंत्र से इलाज कराने आते थे। जिले के कई गांवों में इस आशय के शिलालेख मिले हैं। जिले में एक स्थान पर मानसिक रोगियों के लिए अस्पताल मिलने के प्रमाण मिलते हैं। अंग्रेजी शासन काल में तत्कालीन सीपी एंड बरार में क्षेत्र का सबसे पहला मेडिकल कॉलेज इसी परंपरा व विश्वास से जोड़ा जा सकता है।

डॉ बड़ोनिया के शोध में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि यहां के निवासी अपने परिवार के मुखिया से लेकर निकटतम शासक वर्ग के प्रति विशेष श्रद्घा व सम्मान का भाव रखते थे। वे उनकी मृत्यु के बाद आम नागरिकों की तरह जमीन में दफनाने या दाह संस्कार करने की बजाय उनके शव को उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ किसी गुफा में रख देते थे। उल्लेखनीय है कि यह परंपरा पश्चिमी देश फ्रांस और उज्वेक उजबेकिस्तान (पूर्व सोवियत संघ का अंग) में भी देखी गई है।

छिंदवाड़ा में चारों तरफ फैली हरियाली के इतिहास को भी बड़ोनिया ने खंगालने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक यहां वृक्षों जंगलों की बहुलता का एक बड़ा कारण स्थानीय निवासियों के पूर्वजों द्वारा उन्हें ईश्वर तुल्य मानना है। बड़ोनिया का कहना है कि क्षेत्र में कृषि के बाद लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन वृक्षों से मिलने वाले विभिन्न उत्पाद फल, फूल, वृक्षों की छाल आदि थे।

साभार - सागर (डेली हिंदी न्‍यूज़)

15 October 2011


सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

दिल्ली से चल पड़ी छिंदवाड़ा की ट्रेन...

दिल्ली से चल पड़ी छिंदवाड़ा की ट्रेन... दिल्ली के रेलवे स्टेशन में भी गूंजने लगा छिंदवाड़ा का नाम .... । नई दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन से छिंदवाड़ा के लिए दो सीधी ट्रेनें चल रही है। पिछले संडे हम पहली बार इस स्टेशन पर पहुंचे। साथ में थे भाई अमिताभ अरुण दुबे और अनुज राधेश्याम डोंगरे।

स्टेशन पर पहुंचकर बहुत अच्छा लगा। एकदम शांत और भीड़-भाड़ से दूर जगह थी। मयूर विहार फेस - ३ से ऑटो किया था। पहुंचते ही अनाउंसमेंट हुआ छिंदवाड़ा जाने वाली कान्हनवेली एक्सप्रेस प्लेटफार्म नं. ३ पर खड़ी है। सुनकर मन प्रफुल्लित हो गया। प्लेटफार्म भी खाली था। और ट्रेन भी। लोग कह रहे थे रिजर्वेशन कराने की भी जरूरत नहीं है।

एक अच्छी बात यह रही कि छिंदवाड़ा के लोग यहां मिले। एक बंदा उमरानाला का भी था। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से आगे न्यू रोहतक रोड पर यह स्टेशन है। करोलबाग से आगे।

यहां से दो ट्रेन चल रही है। कान्हनवेली एक्सप्रेस और पातालकोट एक्सप्रेस। छिंदवाड़ा, पातालकोट और सतपुड़ा की हरी भरी वादियों में भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए ये ट्रेनें सौगात ही है। दोपहर १२.२० पर यहां से निकलने वाली ट्रेन छिंदवाड़ा दूसरे दिन सुबह ९.५० बजे पहुंच जाएगी।

तो कीजिए छिंदवाड़ा की सैर...।

और हम सब को हैप्पी दिवाली।

गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

सड़कें अच्छी नहीं, सो हेलीकाप्टर से छिंदवाड़ा जाएंगे आडवाणी


भोपाल - मध्यप्रदेश में सड़कों की हालत चूंकि ठीक नहीं है, लिहाजा जनचेतना यात्रा पर निकल रहे भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी भोपाल से छिंदवाड़ा की 300 किलोमीटर की दूरी हेलीकाप्टर से तय करेंगे। भाजपा ने अपने वयोवृद्ध नेता की अवस्था को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है।

आडवाणी की जनचेतना यात्रा मंगलवार से शुरू हो रही है। उनका रथ 13 अक्टूबर को मप्र की सीमा में प्रवेश करेगा। 16 अक्टूबर को भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है। यहां एक जनसभा को संबोधित करने के बाद आडवाणी हेलीकाप्टर से छिंदवाड़ा रवाना हो जाएंगे और वहां से उनकी यात्रा महाराष्ट्र में दाखिल हो जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा उन्हें विदा करने छिंदवाड़ा तक उनके साथ जाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने भोपाल से छिंदवाड़ा जाने वाले मार्ग की हालत देखकर हेलीकाप्टर का सहारा लेने का फैसला लिया। यदि सड़क की स्थिति अच्छी होती तो आडवाणी निसंदेह सड़क मार्ग से ही छिंदवाड़ा जाते। चूंकि वक्त कम है और सड़क सुधर नहीं सकती, इसलिए हेलीकाप्टर को माध्यम बनाने का निर्णय लिया गया। हालांकि रीवा के हनुमना से लेकर जबलपुर और होशंगाबाद से भोपाल आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आलम यह है कि राजधानी भोपाल में ही मिसरोद से टीटी नगर दशहरा मैदान तक की सड़क पर 20 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसी दशहरा मैदान पर 16 अक्टूबर को आडवाणी की सभा है। इसी तरह होशगाबाद से बुधनी होते हुए भोपाल तक की सड़क की मरम्मत पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस काम में पीडब्ल्यूडी और नगरीय निकाय जुटे हुए हैं। इंजीनियरों से कहा गया है कि वह तीन दिन पहले ही सड़कों को ठीक कर लें।

सूत्रों का कहना है कि काम इतनी तेजी से हो रहा है कि होशगाबाद से भोपाल तक के जर्जर नेशनल हाईवे पर गड्ढे भरे जाने के अलावा डामर की पतली परत भी बिछाई जा रही है। यह अलग बात है कि बड़े वाहनों का लोड उठाने वाली यह सड़क दो-चार दिन बाद फिर पुरानी अवस्था में आ जाएगी।

GNN News, Oct 11th, 2011

बुधवार, 7 सितंबर 2011

दिल्ली से छिंदवाड़ा तक नई ट्रेन का तोहफा

दिल्ली से छिंदवाड़ा के लिए रेलवे ने नई ट्रेन का तोहफा दिया है। रेलवे द्वारा सप्ताह में चार दिन चलने वाली यह ट्रेन यात्रियों को कुछ हद तक जरूर भीड़ से निजात दिलाएगी।

यह ट्रेन दिल्ली के सराय रुहिल्ला से सोमवार, बुधवार, गुरुवार और रविवार को छिंदवाड़ा के लिए चलेगी।

वहीं छिदवाड़ा से दिल्ली के लिए ट्रेन सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को चलेगी।

दिल्ली से यह ट्रेन सोमवार एवं बुधवार को 14020 नम्बर और गुरुवार एवं रविवार को 14010 नम्बर, छिदवाड़ा से मंगल एवं गुरुवार को 14009 और सोमवार तथा शुक्रवार को 14019 के नम्बर के साथ चलेगी


1-छिंदवाड़ा-ग्वालियर (कान्हा वैली एक्सप्रेस) को दिल्ली सराय रोहिल्ला तक ।

2-छिंदवाड़ा- झांसी (पतालकोट एक्सप्रेस) को दिल्ली सराय रोहिल्ला तक ।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

छिंदवाड़ा चलो : सतपुड़ा की सैर पर

छिंदवाड़ा ... देश के हृदय प्रदेश यानी मध्यप्रदेश का खूबसूरत जिला और शहर छिंदवाड़ा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों के प्रदेश मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा जिला छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा... जो सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों में बसा हुआ है। राजधानी भोपाल से छिंदवाड़ा की दूरी लगभग 285 किमी है। रेल मार्ग से इसकी दूरी 337 किमी है। जबलपुर से छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय 225 किमी है। वहीं महाराष्ट्र के नागपुर शहर से इसकी दूरी 130 किमी है। राजधानी भोपाल से सड़क और रेलमार्ग से छिंदवाड़ा आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से जाना चाहते हैं तो आपको नागपुर हवाई अड्डे का रुख करना पड़ेगा। यहां से आप बस से छिंदवाड़ा पहुंच सकते हैं।
आओ छिंदवाड़ा की सैर करें

अक्टूबर से फरवरी तक निहारी जा सकती है पातालकोट की खूबसूरती

अगर आप छिंदवाड़ा घूमने-फिरने का प्लान बना रहे है तो आपके लिए यह जानना जरूरी होगा कि आप क्या-क्यादेख सकते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि यहां घूमने जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी माह केबीच का होता है। हां, अगर आप पातालकोट देखने की इच्छा रखते है तो इसकी खूबसूरती अक्टूबर से फरवरी तकनिहारी जा सकती है। छिंदवाड़ा में कई पर्यटन स्थल हैं जैसे रहस्यमयी दुनिया पातालकोट, गोंडवंश की राजधानीरहा देवगढ़ किला, बादल भोई जनजातीय संग्रहालय, जाम सांवली का हनुमान मंदिर, कुकड़ा और लिलाहीजलप्रपात और अनहोनी आदि।

आदिवासी म्यूजियम

छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित आदिवासी म्यूजियम लोगों के आकर्षण का खास केंद्र होता है। संग्रहालय की शुरूआत 20 अप्रैल 1954 ई. में हुई थी। 1975 ई. में इस संग्रहालय को राज्य संग्रहालय का नाम दिया गया। लेकिन 8 सितम्बर 1997 ई. को इसका नाम बदल कर श्री बादल भोई जनजातीय संग्रहालय रख दिया गया। श्री बादल भोई इस जिले के क्रांतिकारी जनजातीय नेता थे। उन्हीं के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया। इस जनजातीय संग्रहालय को 15 अगस्त 2003 में सभी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। यह संग्रहालय पर्यटकों के लिए प्रतिदिन खुला रहता है। इस संग्रहालय में इस जिले में रहने वाले जनजातीय लोगों से जुड़े संरक्षित घरों के भण्डार और अनोखी वस्तुएं देखी जा सकती है। यहां आप घर, कपड़े ,आभूषण, शस्त्र, कृषि उपकरण, कला, संगीत, नृत्य, धार्मिक गतिविधियां आदि चीजें देख सकते हैं। इस संग्रहालय में जनजातीय समुदायों की परम्परा और पुरानी संस्कृति की झलकियां भी देखने को मिलती है। इस जिले में गोंड और बेगा प्रमुख जनजातियां है।

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पातालकोट-

पातालाकोट आपको रहस्यमयी दुनिया में ले जाता है। यह छिंदवाड़ा जिले के तमिला ब्लॉक में स्थित है। यह जगह भौगोलिक एवं दर्शनीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। पातालकोट एक खूबसूरत लैंड स्कैप है। यह जगह घाटी से 1200-1500 फीट की गहराई में स्थित है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य ही यहां की विशेषता है। कहीं सघन वन हैं तो कहीं हरियाली वाले सपाट मैदान जो किसी खूबसूरत पेंटिंग का आभास देते हैं। दूध की तरह सफेद पानी वाली कलकल करती बहती हुई नदी चलते हुए क़दमों को रोकने पर मजबूर कर देती है।
कब जाएं- घाटी को ऊपर से देखने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। घाटी में नीचे उतरकर इसकी खूबसूरती अक्टूबर से फरवरी तक निहारी जा सकती है।
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कैसे पहुंचे-

देवगढ़ किला-
यह काफी प्रसिद्ध किला है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह किला काफी महत्वपूर्ण है। यह किला एक ऊंचे पर्वत पर बना हुआ है। इस किले के आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता भी देखने योग्य है। 18 वी शताब्दी में यह जगह गोंड वंश की राजधानी थी। विभिन्न पुरातात्विक संरचनाएं जैसे महल, किला और अन्य इमारतें अपनी खूबसूरती के कारण अधिक संख्या में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। ऐसा माना जाता है देवगढ़ को गोंड वंश के राजा जटावा ने निर्मित करवाया था। इस किले की बनावट काफी हद तक मुगल वास्तुकला से संबंधित है।
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कैसे पहुंचे-

छिंदवाड़ा के आसपास भी है और नजारें

मोगली के 'मोगलीलैंड' में आईये
छिंदवाड़ा आने पर इसी जिले से लगे पेंच टाइगर रिजर्व को भी देखा जा सकता है। इसे मोगलीलैंड के नाम भी जाना जाता है। इसका एक नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी पेंच राष्ट्रीय पार्क है। यहां मोगली पेंच अभयारण्य भी है। महाराष्ट्र के नागपुर शहर से इसकी दूरी 80 किमी और छिंदवाड़ा से 120 किमी है। जबलपुर से इसकी दूरी 190 किमी है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 से जुड़े इस उद्यान को आपने मशहूर टीवी सीरियल मोगली में देखा होगा।

द जंगल बुक की एनिमेटेड मोगली की कहानी इसी जंगल से ताल्लुक रखती है। इस उद्यान में जाने का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से जून का होता है। वर्ष 2001 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 55 बाघ हैं इसके अलावा यहां सांड, जगली कुत्ता, चीता, सांभर, नीलगाय, चीतल, लोमड़ी, भेडिय़ा, भालू इत्यादि कई प्रकार केजानवर है। यहां आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। पेंच में ठहरने के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म की ओर से 6 रिजॉर्ट बनाए गए है।
संपर्क- पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी (मध्यप्रदेश) फोन - 07692-223794, 222169
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कैसे पहुंचे-

http://seoni.nic.in/

http://www.seoni.nic.in/pench.htm#Bk1

Email penchtr@bom6.vsnl.net.in

Manager Bison Retreat Rukhad Dist Seoni,
Phone no. 07695-246429

कुकड़ी खापा और लिलाही जलप्रपात-
कुकड़ी खापा जलप्रपात सिल्लेवनी पर्वत पर स्थित है। इस झरने की ऊंचाई लगभग 60 फीट है। इसके अलावा लिलाही जलप्रपात इस जिले की दूसरी बड़ी नदी है। यह झरना पर्वत एवं पहाड़ों से चारो ओर से घिरा हुआ है।
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नीलकंठी- नीलकंठी मंदिर छिंदवाड़ा शहर के दक्षिण-पूर्व में 14 मील की दूरी पर स्थित है। मंदिर का प्रवेश द्वार 7 वी और 10 वी शताब्दी के बारे में बयां करता है। इस मंदिर का दरवाजा ब्रह्माणी शैली में बना हुआ है।

अनहोनी- अनहोनी गांव झीरपा गांव से दो मील की दूरी पर स्थित है। इस गांव में पास में एक झील है जिसमें उबालता हुआ पानी बहता हे। ऐसा माना जाता है कि इस झील में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाता है।
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http://www.chhindwara.nic.in/tourism.htm

कहां ठहरें
साकेत होटल
लोकेशन: छोटे तालाब के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-244604

रॉयल पैलेस
लोकेशन: अल्का टाकीज के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-244702

रिलेक्स होटल
लोकेशन: पाटनी पेट्रोल पम्प के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-245195

रेन बसेरा
लोकेशन: कलेक्टे्रट इमारत के सामने, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-222315
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कैसे पहुंचे छिंदवाड़ा

वायु मार्ग : सबसे नजदीकी एयरपोर्ट नागपुर है। नागपुर से छिंदवाड़ा की दूरी १३० किलोमीटर है।
रेल मार्ग : सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा में स्थित है। इसके अलावा नागपुर में भी रेलवे स्टेशन है। नागपुर स्टेशन से छिंदवाड़ा बस या टैक्सी द्वारा भी जाया जा सकता है।
सड़क मार्ग : छिंदवाड़ा भारत के कई प्रमुख शहरों जैसे नागपुर, भोपाल और जबलपुर आदि से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

विभिन्न शहरों से दूरी
भोपाल- 256 किमी, रेल से दूरी 337 किमी.
नागपुर- 130 किमी
जबलपुर- 215 किमी

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

पूरे विश्व में गूंजेंगे छिंदवाड़ा के मंगलगान

छिंदवाड़ा। भारत सहित संपूर्ण विश्व के जैन जगत में अपना स्थान बनाने वाली जैन समाज के युवाओं की संस्था अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन शाखा छिंदवाड़ा के युवा जिन शासन की निर्दोष प्रभावना के साथ राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर विविध धार्मिक, सामाजिक, साहित्यक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से संगीतमय प्रस्तुती देकर अपने जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। फेडरेशन के सचिव दीपक राज जैन के अनुसार छिंदवाड़ा युवा फेडरेशन को इस मुकाम तक पहुंचाने में संगीत अपने आप में विशेष स्थान रखता है जिसके माध्यम से आज भारत सहित संपूर्ण विश्व में आयोजित होने वाली पंचकल्याणक महोत्सव में फेडरेशन की सहयोगी संस्था सीमंदर संगीत सरिता के मंगलगान गूंज रहे है।

मंगलायतन मंगलाजंली बनाया:-
अध्यातम की गंगा भक्ति की यमुना एवं सिद्धांतों की सरस्वती ऐसी पावन त्रिवेणी में स्थान कर छिंदवाड़ा फेडरेशन के युवा गीतकार प्रत्यूष जैन एवं डॉ। विवेक जैन ने अपनी मन भावन सुंदर लेखनी से पंचकल्याणक महोत्सव के सोलह भजनों की रचना कर युवा विद्धान पं. ऋषभ शास्त्री के संयोजन में गायक श्रीपाल आरोनकर छिंदवाड़ा, गोविंद निवालकर बैतूल एवं श्रुति चौधरी नागपुर के मधुर स्वरों में मंगलायतन मंगलांजली के नाम से सीडी में समाहित किया है। जिसका संगीत सयोजन पुस्कर देशमुख मुलताई ने किया है।

एमपी हिंदी एक्सप्रेस से साभार /08 March 2011

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

माताजी निर्मलादेवी का 'निर्मल' साया उठ गया

21 March, 1923 - 23 Feb, 2011
माताजी निर्मला देवी का उनके मानने वालों, चाहने वालों से दूर चले जाना वास्तव में काफी दुखद अहसास है वे हमारे जिले की महान शख्सियत थीं। जिले की मशहूर हस्तियों में निर्मला देवी का नाम अव्वल रहा है। हम सब उनको ह्दय से श्रृद्धांजलि र्पित करते हैं। हमारी कोशिश रहेगी कि हम उनकी यादों, उनके साथ बिताए लम्हों को एक-दूसरे के साथ शेयर करें अगर आप लोगों के पास ऐसी कोई यादें हो तो छिंदवाड़ा छवि से इसे शेयर कर सकते हैं।

नहीं रही छिंदवाड़ा की महान विभूति माताजी निर्मला देवी

सहजयोग ध्यानपद्धित की संस्थापक एवं मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा शहर में जन्मीं महान विभूति माताजी निर्मलादेवी का २३ फरवरी, बुधवार रात्रि जिनेवा में निधन हो गया। वह करीब ९० वर्ष की थीं। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाली निर्मलादेवी जी ने सहयोग ध्यान पद्धित से विश्व के १४० देशों में भारतीय संस्कृति और धर्म का प्रचार प्रसार किया। निर्मला देवी ने मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय अस्पताल स्थापित किया नागपुर में अंतर्राष्ट्रीय संगीत स्कूल की स्थापना करवाई। छिंदवाड़ा में अंतर्राष्ट्रीय ध्यान योग की नींव रखी थी। अभी उनका पार्थिव शरी वियना में उनके अनुयायियों के दर्शनार्थ रखा गया है। सहजयोग महोत्सव के प्रवक्ता ललित जैन ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी है।
छिंदवाड़ा स्थित माता निर्मल देवी का निवास स्थान
माता निर्मला देवी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इन पर क्लिक करें

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सहजयोग
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इनसाइक्लोपीडिया पर निर्मला देवी
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श्रीमाताजी.नेट
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http://www.indian-skeptic.org/html/is_v03/3-2-16.htm

http://www.kheper.net/topics/gurus/Mataji.htm

http://www.google.co.in/search?q=nirmala+devi&hl=en&client=firefox-a&hs=s7d&sa=G&rls=org.mozilla:en-US:official&channel=s&prmd=ivnso&source=univ&tbs=vid:1&tbo=u&ei=uHtmTaPZGdDIrQepkMzaCg&ved=0CGgQqwQ

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

अनिल करमेले जी की कविता : कहाँ है छिन्दवाड़ा ?

मुंबई इलाहाबाद जयपुर हैदराबाद कलकत्ता में
कितनी बार पूछा लोगों ने - कहाँ है छिन्दवाड़ा ?

और फिर ख़ुद ही कहते-
अच्छा वही न जहाँ से पार्लियामेंट में....

और मैं हर बार डूबता शर्म से
लोग कहते नहीं अघाते क्या से क्या हो गया शहर

हाँ सचमुच क्या से क्या हो गया यह शहर !
गोंडवाना के सिपहसालारों

क्या पहचान बनी है इस छिन्दवाड़ा की।

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग- पांच

कोल फील्ड, रेमण्ड्स, हिन्दुस्तान लीवर जैसे बड़े ही नहीं
गोंडवाना के इस जनपद की फसलों पर पलते पचासों उपक्रम
इस जनपद के बाशिंदों को
खलासी और लोडर के अलावा कहाँ कुछ बना पाए ?

मसें भीगते ही लड़के
शामिल होते रहे बेरोज़गारों की भीड़ में
तंबाकू चबाते कभी इस ब्रिगेड
कभी उस ब्रिगेड के हाथों में खेलते
पहुँचाते रहे अपना इस्तेमाल करने वालों को सदनों में

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग- चार

जहाँ कभी घास बाज़ार था और
टोकनी में फल बैठती थीं फलवालियाँ
जिला अस्पताल, बैल बाजार, नागपुर नाका, चक्कर रोड,
फव्वारा चौक, सी०एम० काम्प्लेक्स
जहाँ मजे से सायकल लेकर टहला जा सकता था

अब सड़क दर सड़क पटी पड़ी हैं दूकानों से
और बुछे चेहरों से ग्राहकों का इंतज़ार करते दूकानदार
शहर के बुनियादी मुहल्ले बरारीपुरा, दीवानजीपुरा और छोटीबाजार
घिसट रहे हैं हाशिए पर

नवधनिक और पास के गाँवों से आए नए सामंत
घूमते हैं शहर में छाती फुलाए

उजाड़ में फैलते इस शहर को
90 के बाद जैसे लकवा मार गया

जिसकी भूमिका बन गई थी 90 के दशक में

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग- तीन

किसकी नज़र लग गई उसी छिन्दवाड़ा को कि
सैकड़ों कालोनियों में बसकर भी
उजड़ गई उसकी आत्मा

किसकी नज़र लगी इस शहर को
जिसका बाल भी बाँका नहीं कर पाया 84 का गिरा बरगद
न 6 दिसंबर बानवे को ढहा दी गई मस्जिद
वह पिछले बीस सालों में हो गया बिजूके की तरह

जिसमें हंडी की जगह पराए प्रतिनिधि की खोपड़ी रखी है
जिसने बख़्शा नहीं किसी शरीफ़ रहबर को
पंख आने से पहले ही मसल दिए गए सारे स्थानीय

और जो बचे फिसड्डी तीसरे दर्ज़े के कमदिमाग लंपट
वे सबके सब युवा-ब्रिगेड में हो गए शामिल
आज वे बन गए गाँवों और कस्बों के रहनुमा
नहरें सारी मुड़ गईं उनके खेतों की ओर

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग-दो

कहाँ गया वह शहर
जहाँ साल में वारदात-ए-हत्या बमुश्किल होती रही
जहाँ छोटी बाजार की रामलीला
पोला ग्राउंड का पोला दशहरा और
स्टेडियम का होली कवि सम्मेलन
बस होते मनोरंजन के साधन रहवासियों के

जहाँ आँखें पोंछते दिखाई देतीं पाटनी टाकीज से
फिल्म देखकर निकली महिलाएँ
टोकनी में फल और फुटाने रखकर
घर-घर आवाजें लगातीं फलवालियाँ
मज़े से गपियाती चूड़ी पहनाती चूड़ीवालियाँ
रिक्शेवाला पता नहीं, पूछता था किसके घर जाना है

जहाँ से जाने का नाम नहीं लेते थे
जाने कहाँ-कहाँ से ट्रांसफर पर आए
बाबू पटवारी और छोटे बड़े अध्यापक
वे कुछ दिनों के लिए आए और
उनकी पीढ़ियाँ यहीं की होकर रह गईं

छिन्दवाड़ा : अनिल करमेले जी की कविता, भाग-एक

जो पहुँचे कभी-कभार

और जिन्होंने मदमस्त फागुन या करवट बदलते
कार्तिक में गुज़ारीं ख़ूबसूरत शामें
और रूई से मुलायम रातों के नशीले
आगोश में अलमस्त रहे छिन्दवाड़ा में

कहते- बड़ा अच्छा शहर है
ऐश्वर्या की आँखों की तरह शांत

अहा! ताज़ी गोभी सीताफल सिंघाड़े और आलू का स्वाद
अभी तक याद है

और वहाँ के सरल सीधे लोग
जो बतियाने लग जाएँ तो
घंटों रहें साथ और छोड़ने आएँ बस स्टेंड तक

वही छिन्दवाड़ा जहाँ बरारीपुरा से निकलकर कवि श्रेष्ठ विष्णु खरे
पहुँचे सबकी आवाज़ के परदे में

जहाँ एक मुहल्ले में सिसकियाँ उठतीं तो
पता लग जाता सारे शहर को

जहाँ अभागे प्रेमी झुंझलाते पैर पटकते कहते
नहीं जगह कोई ऐसी
जहाँ मिल न जाएँ परिचित दो

-अनिल करमेले

कविता कोश से साभार







शनिवार, 29 जनवरी 2011

छिंदवाड़ा : मशहूर रेडियो एनाउंसर युनुस खान की यादों में


आजकल विविध भारती के अहाते में घुसते ही सब बड़ा सुकून महसूस कर रहे हैं । और इसकी वजह ये है कि विविध भारती के अहाते में आजकल एक गुलमोहर दहक रहा है ।

गुलमोहर मेरी स्‍मृतियों में शामिल रहा है । अभी भी याद है गुलमोहर के लाल होने का मतलब था परीक्षाओं का क़रीब आ जाना । स्‍कूल और कॉलेज की पढ़ाई के दिनों में कभी तसल्‍ली से गुलमोहर के नीचे बैठने का सौभाग्‍य नहीं मिला ।

मुझे याद है म.प्र. के शहर छिंदवाड़ा में हमारे कॉलेज के मैदान के एक छोर पर गुलमोहर का पेड़ था । उसमें लाल फूलों की बहार आई होती थी और हम साइंस की पढ़ाई में बौराये से फिरते थे । फुरसत तक नहीं होती थी उसे देखने की । एक दिन एक मित्र ने कहा—‘ऐसा लगता है जैसे किसी ने हमारे पीछे कुत्‍ता छोड़ रखा है, क्‍या दिन हैं यार, गुलमोहर के नीचे बैठने तक का वक्‍त नहीं है ।‘ और उसके बाद वो भविष्‍य की चिंताओं में डूब गया ।

हम वो लोग थे जो प्री इंजीनियरिंग टेस्‍ट में नाकाम रहे थे यानी मां-बाप के हमें इंजीनियर बनाने के सपने पर पानी फेर चुके थे । इसलिये ज़िंदगी में कोई अच्‍छा कैरियर बनाने का दबाव रहता था । मेरे साथ तो मामला और भी दिलचस्‍प था ।

सामाजिक और पारिवारिक दबाव के तहत मैं बी.एस.सी कर रहा था, वरना मन तो लेखन, पत्रकारिता और रंगमंच में लगता था । उन दिनों में आकाशवाणी छिंदवाड़ा में कैजुअल कंपियर बन चुका था । और युववाणी पेश किया करता था, यानी जो बचा खुचा समय था वो भी खत्‍म । घर वालों ने उम्‍मीद छोड़ दी थी कि इस लड़के को कोई ठीक ठिकाने का कैरियर मिलेगा ।

रेडियोवाणी से साभार
http://radiovani.blogspot.com/2007/05/blog-post_26.html

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

बहुत पसंद हैं मुझे छिंदवाडा के लोग

छिंदवाडा मतलब छिंदवाडा- भाग -2
वो जगह दिल के हमेशा करीब होती है और उस जगह को भी अपनी सफलता का श्रेय जाता है, मगर हम सफलता की चादर से अपनी कमियों को ढकने के बजाए, मिलकर सही दिशा में काम कर सकते हैं.

छिंदवाडा कमलनाथ के नाम से तब तक जोड़ा जाएगा जब तक हम पत्रकारों को नेतागिरी के अलावा कोई ख़ास बात करने का टॉपिक नहीं देंगे. छिंदवाडा बहुत ही शांत और प्यारी जगह है, मुझे यहाँ के लोग बहुत पसंद हैं. कमी लगी तो सिर्फ एक बात की- एमबीशन .

यहाँ पर हम सब बहुत थोड़े में समाधान कर लेते हैं. स्कूल में रट-रटकर अछे नंबर ले आयें तो काफी है, कौनसी डिग्री लेनी है और क्या नौकरी करनी है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता - मगर किस डिग्री के बाद जल्दी से जल्दी ज्यादा पैसा मिलेगा ये मायने रखता है, इत्यादि.

परिवार-पड़ोसियों के प्रपंच, कांग्रेस बीजेपी के मुद्दे, 9 to 5 जॉब और शादियों की तैयारियों से बहार निकलना होगा. ये सोचिये कि जिन शहरों में प्रगति हो रही है, जैसे बम्बई या चेन्नई या कोई भी और मेट्रो. वहां अगर लोग आराम की ज़िन्दगी जिए और छोटे सपनो में समाधान कर लें, तो क्या उन शहरों में प्रगति होगी? फर्क सिर्फ सोच का है. सरकार तो पूरे भारत की झोल है, हम सारा भांडा सरकार के मत्थे नहीं फोड़ सकते!

रही बात उन लोगों कि जो छिंदवाडा में पले बढे हैं, सफल हुए हैं, मगर छिंदवाडा को श्रेय नहीं देते-

कभी गौर फरमाइयेगा कि उन सफल लोगों में काफी लोग दूसरे शहरों में जाकर पढ़ते हैं, दूसरे शहरों में काम भी करते हैं ....भारत बहुत बड़ा देश है और आप किसी भी व्यक्ति की सफलता को एक जगह से नहीं बाँध सकते. श्रेय लूटने के बजाये हमें अपना एमबीशन अपनी महत्वांकांक्षाओं बढाने पर ध्यान देना चाहिए. ये बात बिलकुल सही है कि जहां हमारी शुरुआत हुई थी वो जगह दिल के हमेशा करीब होती है और उस जगह को भी अपनी सफलता का श्रेय जाता है, मगर हम सफलता की चादर से अपनी कमियों को ढकने के बजाए, मिलकर सही दिशा में काम कर सकते हैं.

Sonia Tiwari, Animator
San Francisco (USA)


Email :sonia.emrc@gmail.com

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

छिंदवाड़ा को हमने कुछ नहीं लौटाया

हम यहां 'छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा' सीरिज की पहली कड़ी के रूप में यह अर्टिकल आपके सामने पेश कर रहे हैं। हमें आपके कमेंट, सुझाव और विचारों का इंतजार रहेगा। -
छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा- भाग एक

वास्तव में दोषी हम ही हैं, क्योंकि किसी स्थान की पहचान, वहां रहने वालों से ही होती है और ऐसा नहीं है कि हम असफल है, या हमने कुछ किया ही नहीं है। छिंदवाड़ा के लोगों ने हर क्षेत्र में ना कमाया है और कामयाबी के शिखर तक पहुचे हैं। किंतु उस सफलता का तो छिंदवाड़ा को कभी श्रेय मिला और ही उन व्यक्तियों ने छिंदवाड़ा की ओर पलट कर ही देखा।

भारत की कुछ फीसदी जागरूक जनता जो सम-सामयिक विषयों में रुचि रखती है, वो निश्चित तौर पर छिंदवाड़ा को जानती है, क्योंकि हर लोकसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सीट कई राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होती है। टीवी न्यूज चैनलों पर चुनाव के एक महीने पहले से ही छिंदवाड़ा में होने वाले संभावित घमासान की चर्चा होती है।
  • क्या छिंदवाड़ा केवल एक व्यक्ति के नाम से ही जाना जाता रहेगा?
  • क्या छिंदवाड़ा की अपनी कोई खूबी नहीं है?
  • क्या छिंदवाड़ा देश के अन्य स्थानों जितना महत्वपूर्ण नहीं है?

इन सवालों को उठाया है छिंदवाड़ा के यूथ अतिशय ने। जवाब जानने के लिए पढि़ए उनका यह अर्टिकल।

मध्य प्रदेश में रहने वाले छिंदवाड़ा को अच्छी तरह से जानते हैं, पर मध्य प्रदेश के बाहर छिंदवाड़ा की अपनी कोई विशेष पहचान नहीं है। भारत की कुछ फीसदी जागरूक जनता जो सम-सामयिक विषयों में रुचि रखती है, वो निश्चित तौर पर छिंदवाड़ा को जानती है, क्योंकि हर लोकसभा चुनावों में छिंदवाड़ा की सीट कई राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होती है। टीवी न्यूज चैनलों पर चुनाव के एक महीने पहले से ही छिंदवाड़ा में होने वाले संभावित घमासान की चर्चा होती है और इसी बीच जनता जिन शब्दों या व्यक्तियों के नाम सुन लेती है, उन्हें लंबे समय तक याद रखती है। हर पांच वर्षों में ये शब्द और व्यक्तियों के नाम छिंदवाड़ा के नाम के साथ उनके मस्तिष्क में तरो ताज़ा होते रहते हैं।

छिंदवाड़ा की अपनी पहचान को लेकर कुछ सवाल यहां उठाए जा सकते हैं-

क्या छिंदवाड़ा केवल एक व्यक्ति के नाम से ही जाना जाता रहेगा?
क्या छिंदवाड़ा की अपनी कोई खूबी नहीं है?
क्या छिंदवाड़ा भारत के अन्य स्थानों जितना महत्वपूर्ण नहीं है?

गहराई से चिंतन किया जाए तो ऐसा कुछ भी नहीं है,

- बस हम छिंदवाड़ा वासियों ने ही कभी इसे इतनी तवज्जो नहीं दी
- हमने अपनी सफलताओं में छिंदवाड़ा के योगदान को नहीं समझा, और
- छिंदवाड़ा से बहुत कुछ लेने के बाद भी इसे कुछ नहीं लौटाया

वास्तव में दोषी हम ही हैं, क्योंकि किसी स्थान की पहचान, वहां रहने वालों से ही होती है और ऐसा नहीं है कि हम असफल है, या हमने कुछ किया ही नहीं है। छिंदवाड़ा के लोगों ने हर क्षेत्र में नाम कमाया है और कामयाबी के शिखर तक पहुचे हैं। किंतु उस सफलता का न तो छिंदवाड़ा को कभी श्रेय मिला और न ही उन व्यक्तियों ने छिंदवाड़ा की ओर पलट कर ही देखा।

पर 'जब जागे तभी सवेरा' हम अभी भी छिंदवाड़ा को इसकी पहचान दिलाने के लिए प्रयास कर सकते है।

वास्तव में, छिंदवाड़ा की अपनी एक अलग निराली बात है, बस हमें इसे समझना होगा और तभी हम दुनिया के सामने छिंदवाड़ा को इसकी अलग पहचान के साथ पेश कर पाएंगे।

- अतिशय
atishaybio@gmail.com

सोमवार, 10 जनवरी 2011

छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा की क्या पहचान... छिंदवाड़ा की कौन सी
बात आपको अच्छी लगती है। कुछ लिखिए छिंदवाड़ा के बारे में। छिंदवाड़ा छवि की विशेष
पेशकश ...छिंदवाड़ा मतलब... कमलनाथ नहीं। छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा। खास आपके सहयोग
से।

(यहां हम न तो कमलनाथ जी के योगदान, उपलब्धियों को कम कर रहे हैं। न तो उस विषय पर चर्चा कर रहे हैं कि छिंदवाड़ा से कमलनाथ बने, या कमलनाथ से आज का छिंदवाड़ा। यह अलग बहस, चर्चा का विषय हो सकता है। लेकिन हम यहां इस विषय पर बात नहीं करेंगे। हम यहां बात करने जा रहे हैं। भारत के ह़दय प्रदेश यानी मध्यप्रदेश के उस खूबसूरत जिले और शहर छिंदवाड़ा की। जो क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश में सबसे बड़ा है। उस जिले की उन महान शख्सियतों के बारे में। जिनके कारण छिंदवाड़ा की एक खास पहचान है। हम कुछ चुनिंदा पर्यटन, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की भी हम चर्चा करेंगे। साथ ही हम आज की न्यू जनरेशन यानी यूथ के बारे में भी चर्चा करेंगे, जो देश के तमाम शहरों और विदेशों में अपनी पहचान बनाने में जुटी हैं। साथ ही अपनी माटी छिंदवाड़ा को भी पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।)

सवाल- कहां के रहने वाले हो? जवाब- छिंदवाड़ा। फिर सवाल - छिंदवाड़ा कहां? जवाब- छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)। अच्छा-अच्छा कमलनाथ का छिंदवाड़ा।छिंदवाड़ा वालों को अक्सर ऐसे ही सवालों से दो चार होना पड़ता है। मेरे साथ भी यही वाकया पेश आता है। कुछ लोग समझते हैं कि छिंदवाड़ा छत्तीसगढ़ में है। ऐसा मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के बाहर किसी शहर में रहते हुए सुनने को मिलता है। पिछले तीन सालों से मैं दिल्ली में हूँ। यहां अक्सर छिंदवाड़ा को लेकर यही बात होती रहती है। खैंर...।

अब बात। कमलनाथ का छिंदवाड़ा की...। तो छिंदवाड़ा कमलनाथ का नहीं है। न ही कमलनाथ छिंदवाड़ा के। छिंदवाड़ा मतलब... कमलनाथ नहीं है। छिंदवाड़ा मतलब छिंदवाड़ा होता है। कमलनाथ का जन्म १८ नवंबर, १९४६ को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। दून स्कूल में उनका एजूकेशन हुआ। बाद में उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। कमलनाथ छिंदवाड़ा के सांसद और छिंदवाड़ा से मंत्री है। इसलिए लोगों को छिंदवाड़ा मतलब कमलनाथ ही याद आता है।

देश में कई जिले हैं। सभी जिलों का नाम सबको याद हो ये जरूरी भी नहीं है। फिर किसी जिले या शहर को अपनी राष्ट्रीय और विश्वव्यापी पहचान बनाने में काफी वक्त लगता है।

वापस कमलनाथ पर आते हैं। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि कमलनाथ को पूर्व प्रधानमंत्री स्व। इंदिरा गांधी छिंदवाड़ा लेकर आई थी। छिंदवाड़ा के शुक्ला ग्राउंड (मौजूदा इंदिरा गांधी स्टेडियम) में कमलनाथ को जनता से रूबरू कराया गया था। ये सन १९७९ की बात है। उस समय इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को तीसरा बेटा कहा था। कमलनाथ पहली बार ७ वीं लोकसभा के लिए छिंदवाड़ा से सांसद चुने गए थे। इसके बाद वे लगातार वहां से सांसद चुने जाते रहे है।

पंखा वाले बाबा-

कमलनाथ को छिंदवाड़ा में 'पंखा वाले बाबा' के नाम से जाना जाता है। क्योंकि कमलनाथ अपने हेलिकॉप्टर से जिले के दूर-दराज इलाकों में आसानी से पहुंच जाते हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से कमलनाथ तीन दशक से छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें एक-दो बार ही हार का मुंह देखना पड़ा होगा।