शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

छिंदवाड़ा चलो : सतपुड़ा की सैर पर

छिंदवाड़ा ... देश के हृदय प्रदेश यानी मध्यप्रदेश का खूबसूरत जिला और शहर छिंदवाड़ा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों के प्रदेश मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा जिला छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा... जो सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों में बसा हुआ है। राजधानी भोपाल से छिंदवाड़ा की दूरी लगभग 285 किमी है। रेल मार्ग से इसकी दूरी 337 किमी है। जबलपुर से छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय 225 किमी है। वहीं महाराष्ट्र के नागपुर शहर से इसकी दूरी 130 किमी है। राजधानी भोपाल से सड़क और रेलमार्ग से छिंदवाड़ा आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से जाना चाहते हैं तो आपको नागपुर हवाई अड्डे का रुख करना पड़ेगा। यहां से आप बस से छिंदवाड़ा पहुंच सकते हैं।
आओ छिंदवाड़ा की सैर करें

अक्टूबर से फरवरी तक निहारी जा सकती है पातालकोट की खूबसूरती

अगर आप छिंदवाड़ा घूमने-फिरने का प्लान बना रहे है तो आपके लिए यह जानना जरूरी होगा कि आप क्या-क्यादेख सकते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि यहां घूमने जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी माह केबीच का होता है। हां, अगर आप पातालकोट देखने की इच्छा रखते है तो इसकी खूबसूरती अक्टूबर से फरवरी तकनिहारी जा सकती है। छिंदवाड़ा में कई पर्यटन स्थल हैं जैसे रहस्यमयी दुनिया पातालकोट, गोंडवंश की राजधानीरहा देवगढ़ किला, बादल भोई जनजातीय संग्रहालय, जाम सांवली का हनुमान मंदिर, कुकड़ा और लिलाहीजलप्रपात और अनहोनी आदि।

आदिवासी म्यूजियम

छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित आदिवासी म्यूजियम लोगों के आकर्षण का खास केंद्र होता है। संग्रहालय की शुरूआत 20 अप्रैल 1954 ई. में हुई थी। 1975 ई. में इस संग्रहालय को राज्य संग्रहालय का नाम दिया गया। लेकिन 8 सितम्बर 1997 ई. को इसका नाम बदल कर श्री बादल भोई जनजातीय संग्रहालय रख दिया गया। श्री बादल भोई इस जिले के क्रांतिकारी जनजातीय नेता थे। उन्हीं के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया। इस जनजातीय संग्रहालय को 15 अगस्त 2003 में सभी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। यह संग्रहालय पर्यटकों के लिए प्रतिदिन खुला रहता है। इस संग्रहालय में इस जिले में रहने वाले जनजातीय लोगों से जुड़े संरक्षित घरों के भण्डार और अनोखी वस्तुएं देखी जा सकती है। यहां आप घर, कपड़े ,आभूषण, शस्त्र, कृषि उपकरण, कला, संगीत, नृत्य, धार्मिक गतिविधियां आदि चीजें देख सकते हैं। इस संग्रहालय में जनजातीय समुदायों की परम्परा और पुरानी संस्कृति की झलकियां भी देखने को मिलती है। इस जिले में गोंड और बेगा प्रमुख जनजातियां है।

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पातालकोट-

पातालाकोट आपको रहस्यमयी दुनिया में ले जाता है। यह छिंदवाड़ा जिले के तमिला ब्लॉक में स्थित है। यह जगह भौगोलिक एवं दर्शनीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। पातालकोट एक खूबसूरत लैंड स्कैप है। यह जगह घाटी से 1200-1500 फीट की गहराई में स्थित है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य ही यहां की विशेषता है। कहीं सघन वन हैं तो कहीं हरियाली वाले सपाट मैदान जो किसी खूबसूरत पेंटिंग का आभास देते हैं। दूध की तरह सफेद पानी वाली कलकल करती बहती हुई नदी चलते हुए क़दमों को रोकने पर मजबूर कर देती है।
कब जाएं- घाटी को ऊपर से देखने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। घाटी में नीचे उतरकर इसकी खूबसूरती अक्टूबर से फरवरी तक निहारी जा सकती है।
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कैसे पहुंचे-

देवगढ़ किला-
यह काफी प्रसिद्ध किला है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह किला काफी महत्वपूर्ण है। यह किला एक ऊंचे पर्वत पर बना हुआ है। इस किले के आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता भी देखने योग्य है। 18 वी शताब्दी में यह जगह गोंड वंश की राजधानी थी। विभिन्न पुरातात्विक संरचनाएं जैसे महल, किला और अन्य इमारतें अपनी खूबसूरती के कारण अधिक संख्या में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। ऐसा माना जाता है देवगढ़ को गोंड वंश के राजा जटावा ने निर्मित करवाया था। इस किले की बनावट काफी हद तक मुगल वास्तुकला से संबंधित है।
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कैसे पहुंचे-

छिंदवाड़ा के आसपास भी है और नजारें

मोगली के 'मोगलीलैंड' में आईये
छिंदवाड़ा आने पर इसी जिले से लगे पेंच टाइगर रिजर्व को भी देखा जा सकता है। इसे मोगलीलैंड के नाम भी जाना जाता है। इसका एक नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी पेंच राष्ट्रीय पार्क है। यहां मोगली पेंच अभयारण्य भी है। महाराष्ट्र के नागपुर शहर से इसकी दूरी 80 किमी और छिंदवाड़ा से 120 किमी है। जबलपुर से इसकी दूरी 190 किमी है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 से जुड़े इस उद्यान को आपने मशहूर टीवी सीरियल मोगली में देखा होगा।

द जंगल बुक की एनिमेटेड मोगली की कहानी इसी जंगल से ताल्लुक रखती है। इस उद्यान में जाने का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से जून का होता है। वर्ष 2001 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 55 बाघ हैं इसके अलावा यहां सांड, जगली कुत्ता, चीता, सांभर, नीलगाय, चीतल, लोमड़ी, भेडिय़ा, भालू इत्यादि कई प्रकार केजानवर है। यहां आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं। पेंच में ठहरने के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म की ओर से 6 रिजॉर्ट बनाए गए है।
संपर्क- पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी (मध्यप्रदेश) फोन - 07692-223794, 222169
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कैसे पहुंचे-

http://seoni.nic.in/

http://www.seoni.nic.in/pench.htm#Bk1

Email penchtr@bom6.vsnl.net.in

Manager Bison Retreat Rukhad Dist Seoni,
Phone no. 07695-246429

कुकड़ी खापा और लिलाही जलप्रपात-
कुकड़ी खापा जलप्रपात सिल्लेवनी पर्वत पर स्थित है। इस झरने की ऊंचाई लगभग 60 फीट है। इसके अलावा लिलाही जलप्रपात इस जिले की दूसरी बड़ी नदी है। यह झरना पर्वत एवं पहाड़ों से चारो ओर से घिरा हुआ है।
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नीलकंठी- नीलकंठी मंदिर छिंदवाड़ा शहर के दक्षिण-पूर्व में 14 मील की दूरी पर स्थित है। मंदिर का प्रवेश द्वार 7 वी और 10 वी शताब्दी के बारे में बयां करता है। इस मंदिर का दरवाजा ब्रह्माणी शैली में बना हुआ है।

अनहोनी- अनहोनी गांव झीरपा गांव से दो मील की दूरी पर स्थित है। इस गांव में पास में एक झील है जिसमें उबालता हुआ पानी बहता हे। ऐसा माना जाता है कि इस झील में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाता है।
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http://www.chhindwara.nic.in/tourism.htm

कहां ठहरें
साकेत होटल
लोकेशन: छोटे तालाब के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-244604

रॉयल पैलेस
लोकेशन: अल्का टाकीज के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-244702

रिलेक्स होटल
लोकेशन: पाटनी पेट्रोल पम्प के समीप, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-245195

रेन बसेरा
लोकेशन: कलेक्टे्रट इमारत के सामने, छिंदवाड़ा।
फोन: 07162-222315
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कैसे पहुंचे छिंदवाड़ा

वायु मार्ग : सबसे नजदीकी एयरपोर्ट नागपुर है। नागपुर से छिंदवाड़ा की दूरी १३० किलोमीटर है।
रेल मार्ग : सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा में स्थित है। इसके अलावा नागपुर में भी रेलवे स्टेशन है। नागपुर स्टेशन से छिंदवाड़ा बस या टैक्सी द्वारा भी जाया जा सकता है।
सड़क मार्ग : छिंदवाड़ा भारत के कई प्रमुख शहरों जैसे नागपुर, भोपाल और जबलपुर आदि से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

विभिन्न शहरों से दूरी
भोपाल- 256 किमी, रेल से दूरी 337 किमी.
नागपुर- 130 किमी
जबलपुर- 215 किमी

6 टिप्‍पणियां:

स्वाति ने कहा…

bahut achha laga apka blog....chhindwara me maine bhi 1 sal padhai ki hai...aur bachpan me har chhutiyon me mama ke ghar jaya karti thi...bachpan ki yade taza ho gayi..

khandarbar ने कहा…

sir aapka blog padhkar bhut
achha laga,,apki yeh koshish
achi,jankari badhane wali hai.

Prabhudayal Shrivastava ने कहा…

अच्छी शुरुवात कम से कम छिंदवाड़ा के किसी युवक कुछ कर गुजरने का ज़ज़्बा तो है|
प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

Prabhudayal Shrivastava ने कहा…

अच्छी शुरुवात कम से कम छिंदवाड़ा के किसी युवक कुछ कर गुजरने का ज़ज़्बा तो है|
प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

Prabhudayal Shrivastava ने कहा…

अच्छी शुरुवात कम से कम छिंदवाड़ा के किसी युवक कुछ कर गुजरने का ज़ज़्बा तो है|
प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

शुभचिंतक ने कहा…
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