बुधवार, 4 जुलाई 2012

छिंदवाड़ा में जन्मा पाकिस्तानी ‘लाल’ सरहदों में उलझा

छिंदवाड़ा (एजेंसी).महज दो दिन पहले ही इस दुनिया में आने वाला “रेहान” दो देशों की सरहदों के बीच उलझ गया है. रेहान के माता-पिता और अन्य परिजनों ने यह नहीं सोचा था कि थोड़ा-सा वक्त छिंदवाड़ा में गुजारने का सुख उन्हें परेशानी में डाल देगा.

दरअसल, पाकिस्तान के सियालकोट में रहने वाली हमीदा बानो ने मंगलवार को जिला चिकित्सालय में एक बच्चे को जन्म दिया है. वीसा पर भारत आई हमीदा और उसके परिजन रेहान के दुनिया में आने से तो खुश हैं लेकिन अब परेशानी अपने घर लौटने में आ रही है.

परिवार में नए सदस्य के जुड़ने से अब उन्हें रेहान को पाकिस्तान ले जाने के लिए उच्च स्तर पर अनुमति लेनी होगी जिसमें समय लग सकता है. वहीं हमीदा बानो के साथ पाकिस्तान से आए परिजनों को ४ जुलाई को खत्म हो रही वीसा अवधि को बढ़ाने की मशक्कत भी करनी पड़ेगी.

छिंदवाड़ा में राज टॉकीज के पास रहने वाले अब्दुल सत्तार खान पंजाबी की पुत्री हमीदा बानो का निकाह पाकिस्तान के सियालकोट में रहने वाले मोहम्मद शरीफ के साथ हुआ था. इस दंपति के पहले से पांच बच्चे हैं. गत ४ जून को हमीदा बानो अपने परिवार के साथ छिंदवाड़ा अपने मायके आई थी. उन्हें सरकार ने ४ जुलाई तक का वीसा प्रदान किया है.

गर्भावस्था में छिंदवाड़ा आई हमीदा को पाकिस्तानी डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी डिलेवरी संभवतः जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी. हमीदा निश्चिंत थी कि तब तक वह अपने मायके से ससुराल यानि सियालकोट लौट जाएगी. लेकिन पाकिस्तानी डॉक्टरों का कयास गलत साबित हुआ और हमीदा ने समय पूर्व २६ जून की रात जिला चिकित्सालय में एक बालक को जन्म दे दिया.

बालक के जन्म लेते ही परिवार में खुशी की लहर तो दौड़ी लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें भी उभर आईं. दरअसल, इस परिवार के पास ४ जुलाई तक का वीसा है. उन्हें ट्रेन से पाकिस्तान लौटना है.
दिल्ली से अटारी के लिए सप्ताह में दो दिन बुधवार और रविवार को ट्रेन निकलती है. इस सप्ताह रविवार यानि १ जुलाई और बुधवार ४ जुलाई को दिल्ली से अटारी ट्रेन जाना है. पहले तय कार्यक्रम के मुताबिक हमीदा का परिवार १ जुलाई को दिल्ली से अटारी के लिए निकलने वाला था. ताकि वीसा अवधि समाप्त होने के पहले वे वापस पाकिस्तान पहुंच जाएं. लेकिन रेहान के जन्म से अब वीजा अवधि तक पाकिस्तान लौट पाना संभव नहीं है.