बुधवार, 26 दिसंबर 2012

वक्त से पहले वक्त से आगे कमलनाथ का छिन्दवाड़ा


विकास का श्रेष्ठतम स्वरूप है छिन्दवाड़ा !

उद्योग क्षेत्र-
1 पैक हाउस अठारह करोड़ की लागत से बने मोहखड विकास खण्ड के ग्राम तन्सरामाल में संतरा उत्पादक किसानों के लिए निर्मित।
2 मसाला पार्क-20 करोड़ की लागत से मसाला फसलों के उत्पादक किसानों को उनकी कृषि उपज का उचित मूल्य दिलवाने तथा रेाजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से निर्मित।
3 टेक्सटाईल्स पार्क-400 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले टैक्सटाईल्स पार्क के साथ में 40 मेगावाट विद्युत परियोजना एक साथ संचालित करने का दृढ़ संकल्प।
औद्योगिक क्षेत्र-
1. हिंदुस्तान युनिलिवर की स्थापना 2. रेमण्ड की स्थाना 3. भंसाली की स्थाना 4. ब्रिटानिया की स्थापना, 5. सूर्यवंशी स्पिनिंग मिल की स्थापना, 6. पीबीएम पॉलीटेक्स की स्थापना 7. क्योरबर्थ लिमिटेड की स्थापना 8. ऑटोमेटेड सेंटर फॉर टेस्टिंग इंसपेक्शन ऑफ व्हीकल्स की स्थापना इन फेेक्ट्रियों में जिले के युवा वर्ग को रोजगार दिलवाया गया है। साथ ही 10-12 वीं पास युवाओं के लिए कमलनाथ जी द्वारा देश की नामी गिरामी कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है। छिंदवाड़ा शहर में जानी मानी कंपनियों के कैंपस लगाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया गया।

सड़क सुविधाएं-सड़कों के महाजाल में छिंदवाड़ा जिला देश में प्रथम जिला है। 1. राष्ट्रीय राजमार्ग को छिंदवाड़ा से जोडऩे के लिए रिंग रोड का निर्माण राशि 1433 करोड़ रूपये स्वीकृत रूपये स्वीकृत। नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा मार्ग, मुलताई से छिंदवाड़ा सिवनी बाईपास, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 400 से 800 तक की जनसंख्या वाले आदिवासी व गैर आदिवासी ग्रामों में ग्रामीण सड़कों का निर्माण स्वीकृत। छिंदवाड़ा शहर के चारफाटक रेलवे क्रॉसिंग छिंदवाड़ा से सिवनी मार्ग पर फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण कार्य, छिंदवाड़ा के ग्राम ईमलीखेड़ा में अण्डरब्रिज का निर्माण पाण्डुर्ना रिंग रोड हेतु 23 करोड़ की योजना स्वीकृत कार्य, भारत सरकार के उपक्रम एनटीवीसी और एनबीसी के द्वारा एक करोड़ दस लाख रूपये की राशि पाण्ढुर्ना, सौंसर एवं बिछुआ की विभिन्न सड़कों हेतु स्वीकृति, डब्ल्यूसीएल के मार्फत सीएसआर पर छिंदवाड़ा जिले में करोड़ों रूपये की सड़कों का महाजाल शीघ्र प्रारंभ, एनटीपीसी तथा एनबीसीसी एवं पावरग्रिड ईपीआई, बीएचईएल के द्वारा छिंदवाड़ा जिले में करोड़ों रूपये की सड़कों का महाजाल शीघ्र प्रारंभ, एनटीपीसी तथा एनबीसीसी एवं पावरग्रिड ईपीआई बीएचईएल के द्वारा छिंदवाड़ा जिले में आंतरिक सड़कों का कार्य शीघ्र प्रारंभ। ग्रामीण अंचलों एवं पिछड़े क्षेत्रों के विकास हेतु आईएपी एकीकृत कार्य योजना प्रति वर्ष तीस करोड़ की राशि एवं बीआरजीएफ (बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड) चालीस करोड़ अतिरिक्त राशि पिछड़े क्षेत्रों के विकास हेतु प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार द्वारा सौगात दिलाई गयी।

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साभार- उगता भारत

मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

खुदरा पर 'कमल' से लड़ाई में कमल ने ही साख बचाई

 वह अपने लोकसभा क्षेत्र का बहुत खास ख्याल रखते हैं, इतना ज्यादा कि मध्य प्रदेश में उसे 'केंद्र शासित जगह' कहा जाता है। अपने संसदीय क्षेत्र का खास ख्याल रखने की वजह से कई बार उन्हें अपनों की झिड़की भी सुननी पड़ती है। एक बार मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान उन्होंने छिंदवाड़ा से जुड़ा कोई मसला उठाया तो तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को उन्हें यह कहना पड़ा था कि यह छिंदवाड़ा के स्थानीय निकाय की बैठक नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक है।

आदिति फडणीस /  December 14, 2012
बहु-ब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मसले पर पिछले दिनों संसद में बहुत गहमा-गहमी हुई। इस पर संसद के दोनों सदनों में जोरदार बहस हुई। दिग्गज नेताओं ने इसके पक्ष और विपक्ष में एक से बढ़कर एक तर्क पेश किए। इसी सिलसिले में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के नेता और राज्यसभा सांसद वी मैत्रेयन बहुब्रांड खुदरा में एफडीआई की खामियां गिना रहे थे। मैत्रेयन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बहुत बड़ी गलती करने जा रही है। हालांकि बहस के दौरान अपने भाषण में सरकार पर कटाक्ष करते हुए बहस के नतीजे के निचोड़ पर यही कहा, 'आनंद शर्मा हार गए लेकिन कमलनाथ जीत गए।' उनका इशारा साफ तौर पर यही था कि वाणिज्य मंत्री जहां हारे वहीं संसदीय कार्यमंत्री को जीत मिली।


जाहिर है इस टिप्पणी के बाद दोनों मंत्रियों के चेहरों के हावभाव अलग नजर आने थे और ऐसा हुआ भी। एक ओर जहां वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने उनके बयान पर उदासी भरी मुस्कान से जवाब दिया जबकि संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ अपनी खुशी पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने शालीन दिखने की भरसक कोशिश की लेकिन अपनी इस कवायद में वह बुरी तरह नाकाम रहे और फिर वह किसी पॉप स्टार की मानिंद अकड़ में सदन से बाहर निकले, जहां उनके साथी उनकी पीठ थपथपा रहे थे और उनसे हाथ मिलाने को आतुर नजर आ रहे थे।


एक  संवाददाता ने उनसे सवाल किया कि वह सुबह कितने बजे सोकर उठते हैं? उन्होंने जवाब दिया, 'मुझसे यह पूछिए कि मैं रात को सोता कितने बजे हूं?' पिछले हफ्ते उनका अधिकांश वक्त भाग-दौड़ और जोड़-तोड़ में ही बीता। कमलनाथ उन लोगों से फोन पर बातचीत से लेकर व्यक्तिगत रूप से मेल-जोल में लगे थे, जिनके बारे में उनको यकीन था कि वह उन्हें अपने पाले में ले आएंगे और विपक्ष के प्रस्ताव को गिरा देंगे। इसलिए इसमें बहुत ज्यादा हैरानी की बात नहीं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और पार्टी के प्रमुख संकटमोचक अहमद पटेल से जब यह पूछा गया कि उनकी पार्टी मायावती का समर्थन हासिल करने में कैसे कामयाब रही तो उन्होंने यही जवाब दिया, 'आप कमलनाथ से पूछिए।'


बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए कमलनाथ ने उन्हें उनके ही महत्त्वाकांक्षी अभियान से साधा। यह तो सभी जानते हैं कि प्रोन्नति में दलितों के आरक्षण का मसला मायावती के लिए राजनीतिक रूप से बहुत अहम है, ऐसे में उसी की दुहाई देते हुए कमलनाथ ने कहा कि अगर वह इस विधेयक को अंजाम तक पहुंचाना चाहती हैं तो उन्हें यही दिखाने की जरूरत है कि विपक्ष कमजोर, बिखरा हुआ है जो सिर्फ शोर-शराबा मचाने से ज्यादा कुछ और नहीं कर रहा है। अन्यथा 117वां संविधान संशोधन विधेयक कभी मूर्त रूप नहीं ले पाएगा। वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन हासिल करने के लिए उन्होंने सपा सुप्रीमो को समझाया कि इससे उनकी धुर राजनीतिक विरोधी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कमजोर होगी। कमलनाथ ने यादव को समझाया कि एफडीआई प्रस्ताव से भाजपा को छोटे व्यापारियों के बाहुल्य वाली लोकसभा सीटों पर नुकसान उठाना पड़ेगा जो उसकी बड़ी ताकत रहे हैं। सब कुछ सरकार के हक में गया। हर चीज एकदम तय हिसाब से हुई और सदन में सरकार ने साबित कर दिया कि पूरा संगठित विपक्ष भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।


एफडीआई पर मतदान के बाद कमलनाथ मुश्किलों को आसान बनाने वाले खास शख्स बन गए। मगर इसकी वजह से उनका ध्यान उनकी दूसरी जिम्मेदार से विमुख नहीं हुआ। उनके पास शहरी विकास मंत्रालय का दायित्व भी है। वह रोजाना निर्माण भवन के अपने दफ्तर जाते हैं और शाम तक जरूरी फाइलों को निपटाते हुए देखे जा सकते हैं। उनसे मुलाकात करने वाले हर एक व्यक्ति को डाटाबेस में अपना पूरा ब्योरा दर्ज कराना होता है। फिर जैसे ही सूरज अस्ताचल की ओर चला जाता है, तो उन्हें अपने लोकसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा का ख्याल आता है जिसका वह लोकसभा में नौवीं मर्तबा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 

वह अपने लोकसभा क्षेत्र का बहुत खास ख्याल रखते हैं, इतना ज्यादा कि मध्य प्रदेश में उसे 'केंद्र शासित जगह' कहा जाता है। अपने संसदीय क्षेत्र का खास ख्याल रखने की वजह से कई बार उन्हें अपनों की झिड़की भी सुननी पड़ती है। एक बार मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान उन्होंने छिंदवाड़ा से जुड़ा कोई मसला उठाया तो तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को उन्हें यह कहना पड़ा था कि यह छिंदवाड़ा के स्थानीय निकाय की बैठक नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक है।


कुछ लोग उन्हें आपातकाल के दौर में संजय गांधी से घनिष्ठïता की वजह से भी याद करते हैं। मगर वक्त के साथ न केवल अनुभव बल्कि कमलनाथ का कद भी बढ़ा है। यहां तक कि राहुल गांधी जैसे नेता उनकी मिसाल देते हैं। हाल के सूरजकुंड चिंतन शिविर में गांधी ने उनका नाम लेते हुए कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र पर उनकी जबरदस्त पकड़ है और बताया कि उनकी यह खासियत अनुकरणीय है। पार्टी में उनके दूसरे सहयोगी भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते हैं। किसी राजनीतिक दल में ऐसे विरले उदाहरण ही होते हैं। मगर उनके लिए सब कुछ बहुत आसान नहीं होने वाला। कमलनाथ की सबसे बड़ी चुनौती आने वाला बजट सत्र होगी जहां उन्हें सरकार की हर हमले से हिफाजत करनी होगी। कमलनाथ में ऐसा करने का माद्दा है-भौगोलिक विशेषताओं पर उनका नियंत्रण पहले ही साबित हो चुका है।


साभार- http://hindi.business-standard.com

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय

कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
शहरी विकास मंत्री कमलनाथ और छिंदवाड़ा एक दूसरे के पर्याय हैं। छिंदवाड़ा आज जो भी अस्तित्व है उसका एक बड़ा स्तंभ कमलनाथ जी हैं। आज से तीस बरस पहले तक छिंदवाड़ा महज जिला मुख्यालय के रूप में ही जाना जाता था किंतु 1980 के बाद जब से कमलनाथ ने यहां की बागडोर संभाली उत्तरोत्तर विकास करता हुआ छिंदवाडा देश के नक्शे में अपना अलग स्थान बना चुका है।

 जहां पहले यह स्थान देश के अन्य भागों से अलग थलग था, आज देश के बाकी हिस्सों से यातायात के नज़रिये से तो जुड़ा ही है व्यापार, व्यवसाय और राजनैतिक नजरिये से भी प्रदेश और देश का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।

पहले आमला से परासिया तक ही रेल की बड़ी लाइन थी परासिया से छिंदवाड़ा तक का सफर नेरो गेज लाइन से ही करना पड़ता था। कमलनाथजी की पहल से ही इसका अमान परिवर्तन होकर आज छिंदवाड़ा से सीधे ही दिल्ली तक गाडियां उपलब्ध हैं। एवं शेष रेल ट्रेक मे नागपुर छिंदवाड़ा का अमान परिवर्तन का कार्य प्रगति पर होकर आगामी दो वर्ष में पूर्ण होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसके बाद दक्षिण भारत से सीधे ही छिंदवाड़ा का संपर्क हो जायेगा।

छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर अमान परिवर्तन के लिये भी सर्वे हो रहा है और आगामी कुछ ही वर्षों में यह काम भी हो सकेगा। यह सब केवल कमलनाथजी के प्रयास का ही परिणाम है। मुलताई से सिवनी एवं नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा नागपुर रोड राष्ट्रीय राजपथ होकर कार्य स्वीकृत होकर कार्य आरंभ किये जा रहे हैं। निकट भविष्य में जब यह सब काम पूर्ण होंगे तो छिंदवाड़ा का नक्शा ही बदल जायेगा। यह शहर अब महानगर की ओर अग्रसर होता दिखाई पड़ने लगा है। यह केवल कमलनाथ के कारण ही।

इंजिनियरिंग कालेज, कालसेंटर फ्लाई ओवर इनका निर्माण होगा तो छिंदवाड़ा की अलग ही पहचान होगी। एक कर्मठ लगनशील संवेदनशीलता संघर्षरत और छिंदवाड़ा के प्रति समर्पित कमलनाथ छिंदवाड़ा वासियों के हृदय में बसते हैं। विरोधी लाख विरोध करें कमलनाथ का ताज छीनना वर्तमान में तो असंभव है।

अभी हाल में ही आपने बिछुआ क्षेत्र के ग्राम खमरा में [1]खमरा सांख सरवाड़ा [2]खमरा सुरगी और [3]खमरा दातला लुहार बतरी मार्ग के निर्माण का भूमि पूजन किया।राजीव जल मिशन के लिये 6 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की। खमरा बिछुआ में मां दुर्गा और राधा कृष्ण मंदिर निर्माण कराने की घोषणा की।


साभार
प्रवक्ता डॉट कॉम