गुरुवार, 16 मई 2013

छिंदवाड़ा छवि का पांचवां बर्थडे...

'छिंदवाड़ा छवि' से जुड़कर अनूठा अपनापन मिलता छिंदवाड़ा के दोस्तों को
 अब जल्द ही 'छिंदवाड़ा छवि'को डॉट कॉम पर लाने का प्रयास कर रहा हूं। 'छिंदवाड़ा छवि' के जरिए कई सीनियर लोगों से मेरा संबंध प्रगाढ़ होता गया। मशहूर कवि-वरिष्ठ पत्रकार बाबा विष्‍णु खरे ने मुझे अचानक ही गुगल के जरिए मुझे यानी 'छिंदवाड़ा छवि' को खोज लिया। उनसे मुलाकात भी हुई। मुंबई में कार्यरत भाई असद अली को भी मुझसे इसी ने मिलवाया।
आगामी 25 मई को ब्लॉग वेबसाइट 'छिंदवाड़ा छवि' http://chhindwara-chhavi.blogspot.in/ के पांच साल पूरे हो रहे हैं। साल 2008 में मैंने इसे शुरू किया था। उस समय ब्लॉगिंग का दौर चला था। कस्बा, मोहल्ला, भड़ास, रेडियोवाणी जैसे कई ब्लॉग बहुत मशहूर हुआ करते थे।

हमने भी इन ब्लॉगों को पढ़कर इस दिशा में कदम बढ़ाया। तब मैंने http://dongretrishna.blogspot.in/ यूआरएल पर अपना ब्लॉग बनाया। नाम दिया- 'डोंगरे की डायरी'। सोचा था कभी भी नाम बदल देंगे। लेकिन अब तक यहीं चल रहा है। लोग मुझे डायरी वाले डोंगरे जी भी कहने लगे। अपने इस ब्लॉग में मैंने कई पोस्ट डाली। इनमें हमारे छिंदवाड़ा जिले पर भी कुछ पोस्ट थी। बाद में लगा कि छिंदवाड़ा के लिए अलग प्लेटफार्म चाहिए। इसी सोच ने जन्म दिया 'छिंदवाड़ा छवि' को।

उसके बाद से लगातार इसे मैं अपडेट करता आ रहा हूं। एक-दो या तीन नहीं पूरे पांच साल बीत गए। अब जल्द ही इस डॉट कॉम पर लाने का प्रयास कर रहा हूं। 'छिंदवाड़ा छवि' के जरिए कई सीनियर लोगों से मेरा संबंध प्रगाढ़ होता गया। मशहूर कवि-वरिष्ठ पत्रकार बाबा विष्‍णु खरे ने मुझे अचानक ही गुगल के जरिए मुझे यानी 'छिंदवाड़ा छवि' को खोज लिया। उनसे मुलाकात भी हुई। मुंबई में कार्यरत भाई असद अली को भी मुझसे इसी ने मिलवाया।

देश-विदेश के तमाम छोटे-बड़े शहरों में फैले छिंदवाड़ा के दोस्तों को इससे जुड़कर अनूठा अपनापन मिलता है। क्योंकि इंटरनेट पर हिंदी में यही एकमात्र छिंदवाड़ा की साइट-ब्लॉग है। इसका कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। कई आमंत्रित लेखक के रूप में लोग इस प्लेटफार्म पर लिख रहे हैं। छिंदवाड़ा के कई महत्वपूर्ण जगहों की तस्वीरें इस पर देखी जा सकती है। उम्मीद करता हूं कि तमाम दोस्तों का मुझे यूं ही सहयोग मिलता रहेगा। कुछ लोगों को लेखक के रूप में इससे जोड़ने की मुहिम भी शुरू करनी है।

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