बुधवार, 31 जुलाई 2013

टेलीग्राम सेवा के अंत पर विशेष : कूट संकेतों की दुनिया

कभी तेजी से संदेश पहुंचाने का सबसे प्रमुख माध्यम रही टेलीग्राम सेवा 160 साल का लंबा सफर तय करने के बाद बंद हो गई। 15 जुलाई 1855 में भारत में शुरू हुई इस सेवा का 15 जुलाई 2013 को अंत हो गया। एक समय तारसेवा देशभर में खुशी और गम दोनों में कोई भी खबर तेजी से पहुंचाने का एकमात्र जरिया थी। इस मौके पर डाक विभाग में कार्यरत रहे साहित्यकार गोर्वधन यादव जी का यह आलेख....
आइए, मैं आपको कूट संकेतों की रहस्यमय दुनियां में ले चलूं. एक यन्त्र जिसने लगभग समूची दुनिया में एकछत्र राज्य किया. उस यंत्र से डैश-डाट, डैश-डाट लगातार बजता रहता था, और उन संकेतों  का जानकार, उसे अपनी भाषा में लिपिबद्ध करता चलता था. उस यंत्र का नाम था “मोर्स साउन्डर” और जिससे उसे संचालित किया जाता था, का नाम” मोर्स की” कहलाया.  

एक समय वह भी था,जब आदमी को अपने दूर-दराज में बैठे किसी व्यक्ति को कोई जरुरी खबर देनी होती थी, तो उसके पास कोई साधन नहीं थे. आम साधारण आदमी बाजार-हाट में, अपने किसी परिचित को पाकर,उसके हाथ मौखिक अथवा लिखित समाचार दे देता था,और कहता था कि अमुक आदमी तक इसे पहुँचा देना. वह यह नहीं जानता था कि वह पत्र उस आदमी तक पहुँचाया गया अथवा नहीं. वह यह भी नहीं जान पाता था कि उसकी बात गुप्त भी रह पाती है, अथवा नहीं. हाँ, राजा-महाराजाओं के समय में उन्होंने अपने तरीके इजाद कर लिए थे और वे कुछ हद तक उसमें सफ़ल भी रहे थे. लेकिन बावजूद इसके उसमें समय ज्यादा नष्ट होता था.

अमेरिका के चार्ल्स टाउन ( मेसाच्सेट्स) में 27 अप्रैल 1791 में एक बालक ने जन्म लिया,जिसका नाम सेमुअल एफ़.बी.मोर्स रखा गया. आगे चलकर इसी व्यक्ति ने एकल तार टेलीग्राफ़ी प्रणाली और मोर्स कोड का आविष्कार किया, जो चंद मिनटॊं में समाचार, एक स्थान से दूसरे स्थान को पहुँचा देता था. इसमें सबसे बडी खास बात तो यह होती थी कि, उसे जानकार व्यक्ति के अलावा, न तो कोई समझ पाता था और न ही कूट संकेतों को अपनी भाषा में लिख ही पाता था. इस तरह उस व्यक्ति ने समूचे संसार में तहलका मचा दिया. यह बालक जन्मजात चित्रकार था. वह बेहद ही सुन्दर चित्र बनाया करता था. बडा होकर उसने, उस जमाने के सम्राट के पोट्रेट बनाए और बेशुमार धन कमाया.

अपने शहर से दूर,  न्युयार्क शहर के वाशिंगटन मे चित्रकारी कर रहा था. उसके पिता जेविडिया मोर्स ने एक घुडसवार के हाथों एक दुखद समाचार भिजवाया कि उसकी पत्नि का निधन हो गया है. अपनी पत्नि के असमय निधन से उसे बेहद दुख हुआ और उसने अपनी चित्रकारी से मोह भंग हो गया. समाचार उसे मिला तो लेकिन तब तक काफ़ी समय बीत चुका था और वह चाहकर भी वहाँ शीघ्रता से पहुँच नहीं सकता था. उसने निर्णय लिया कि वह कोई ऐसा कारगर उपाय खोज निकालेगा,जिससे समाचार तेज गति से एक स्थान से दूसस्रे स्थान को भेजा जा सके.

सन 1832 में जब वह समुद्रीक यात्रा कर रहा था. संयोग से उसकी मुलाकात, बोस्टन के चार्ल्स थामस जैक्सन नामक एक व्यक्ति से हुई,जिसने विद्धुत चुंबक पर अनेकों प्रयोग किए थे. मोर्स ने उसके सिद्धांत पर आधारित एक ऐसे यंत्र को विकसित किया जो एकल-तार टेलीग्राफ़ी की अवधारणा पर आधारित था. जन्मजात बैज्ञानिक न होते हुए भी उसने यह कारनामा कर दिखाया.

टेलीग्राफ़ी के इस प्रयोग में सफ़लता प्राप्त होते ही इसे सरकारी उपक्रम डाकघर से जोड दिया गया जो उस समय तक पूरे देश में सक्रीयता के साथ अपनी सेवाएं दे रहा था. इस तरह एक नया विभाग “ भारतीय पोस्ट एण्ड टेलीग्राफ़ डिपार्टमेन्ट” अस्तित्व मे आया. देश के सभी जिलों की तहसीलों को उनके जिला मुख्यालय के प्रधान डाकघरॊं  के बीच टेलीग्राफ़ लाइने बिछायी गई और उसे प्रदेश के मुख्यालय मे खोले गए केन्द्रीय तार घरों से जोड दिया गया.  इस तरह समूचा देश टेलीग्राफ सिस्टम से जुड गया.

स्व, राजीव गांधी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश ने आई.टी युग में प्रवेश किया. देखते-ही देखते समूचे देश में कंप्युटर, मोबाईल, फ़ोन और टीवी घरों-घर पहुँच गए. पोस्ट एण्ड टेलीग्राफ दो हिस्सों में बंट गया और वह भारत संचार निगम लिमिटेड बन, एक स्वतंत्र इकाई के रुप में काम करने लगा. यह घटना 2000 की है.  विश्व में नई टेक्नोलाजी के आने के बाद, टेलीग्राफ़ी, जो पूरे विश्व में प्रयोग में लाई जा रही थी, की व्यवस्था समाप्त हो गई.  

टेलीग्राफ़ के कोड को डिकोड करना आमजन के लिए असंभव था. इसीलिए यह सबसे विश्वसनीय बना रहा. टेलीग्राफ़ की भाषा को सीखने के लिए कठिन परिश्रम और प्रशिक्षण की जरुरत होती है. डाक विभाग में कार्य करते हुए मैंने अंग्रेजी तथा हिन्दी में तार भेजने की दक्षता हासिल की थी. अब भी मुझे वे संकेत याद हैं, जिनका उल्लेख यहां कर रहा हूँ. हालांकि आज यह किसी काम के नहीं है, लेकिन इसका अपना इतिहास है और आज वह स्वयं एक इतिहास का विषय बन कर रह गया है, अतः इसका मूल्य और भी बढ जाता है.


किसी भी शब्द के लिए टेलीग्राफ़िक कोड चार अथवा उससे कम की संख्यां में बनाए गए, तथा अंकों को पांच की संख्या में, इस तरह अंग्रेजी भाषा के प्रत्येक शब्द के लिए अलग-अलग कोड बने, जो किसी अन्य से मेल नहीं खाते थे. कुछ अलग से संकेत देने पर, अंग्रेजी भाषा का वह शब्द, हिन्दी में लिखा जाता था.


A   . -       B    - . . .    C    - . - .     D   - . .   E   .  F   . . -  .  G    - - .      H. . . . I   .   J  . - - -   K    - . -    L  . - . .       M   - -        N  - .   O  - - -   P  . - - .    Q  - - . -     R  . - .   S     . . .  T    -     U   . . -     V. . . -       W   . - -    X   - . . -     Y  - . - -    Z    - - . .       


अंकों के लिए पांच चिन्हों का प्रयोग किया जाता है. जैसे  

1   . . . . -  2     . . . - -     3    . .  - - -       4   . - - - -       5    . . . . .   6  - . . . .   7    - - . . . 8 - - - .    9   - - - - .       10 - - - - -   
   

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

ओमप्रकाश नयन की दो कविताएं

आम आदमी
_____________________________

आज
आम आदमी
'आम'
नजर आने लगा है,
जो
कुण्ठा, घुटन और संत्रास के
हाथों में आकर
चूसा जाने लगा है।

-------------ओमप्रकाश नयन

तीली
_____________________________

वक्त ने मेरी जिंदगी के
सीने पर
एक ऐसी तीली
रख दी है,
जिसे सुलगा लेना
मेरी अनिवार्यता
बन गई है।
क्योंकि, इस तीली का
आलोक,
कर सकता है दूर
मन की
घाटियों का
घना अंधेरा।

-------------ओमप्रकाश नयन

कवि का परिचय
युवा रचनाकार श्री ओमप्रकाश नयन का पहला कविता संग्रह 'सच मानो शुकंतला!' शैवाल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह में शीर्षक कविता के अलावा बची रह सके एक उम्मीद, मेरा चिंतन, जन्म दिवस, अलविदा! बीते वर्ष अलविदा, ओ मेरे अभिमन्यु मन!, सच तो यह है!, काश! यदि ऐसा हो तो, आदि कविताएं शामिल है। 22 अप्रैल, 1962 को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जन्में नयन जनसंपर्क विभाग में कार्यरत है। वे कविता के अलावा गीत, गजल, लघुकथा आदि भी लिखते हैं। उनकी रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।

शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

छिंदवाड़ा जिले में पत्रकारिता की नई-पुरानी सभी कहानी

  • दैनिक भास्कर को चुनौती देने की तैयारी में लोकमत समाचार
  • राजस्‍थान पत्रिका भी जल्द ही लांच करने वाला है अपना संस्करण
  • 1989 में ब्यूरो कार्यालय बनाने वाले लोकमत पहला अखबार
  • छिंदवाड़ा के लोगों ने देखा था नवभारत नागपुर का स्वर्णिम दौर
कभी यहां नागपुर से प्रकाशित नवभारत अखबार नंबर वन हुआ करता था। पचास साल से ज्यादा समय तक नवभारत का एकछत्र राज रहा। फिर दैनिक भास्कर ने नवभारत के किले को ध्वस्त किया। अब पहुंचा है लोकमत समाचार। जाहिर सी बात है कि सतपुड़ा की वादियों में बसे मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की पत्रकारिता में अब घमासान मचने वाला है। क्योंकि जल्द से यहां से राजस्‍थान पत्रिका भी लांच हो जाएगा।

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से लोकमत समाचार का एडीशन 12 जुलाई, 2013 को लांच हुआ है। यह लोकमत का प्रदेश में पहला स्वतंत्र संस्करण है। बताया जा रहा है सभी मामलों में लोकमत अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों दैनिक भास्कर, नई दुनिया, जबलपुर एक्सप्रेस से आगे निकलने की कोशिश में है। सूत्र बताते हैं कि अभी लोकमत समाचार की छिंदवाड़ा जिले में करीब 22 हजार कॉपियां पहुंच रही है। इसमें से 11 हजार के करीब प्रतियां शहर में बांटी जा रही है। इसके बावजूद नंबर वन बनने के लिए लोकमत को कड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा। कुछ ही महीनों में यहां से पत्रिका का एडीशन शुरू होने वाला है। वरिष्ठ पत्रकार हरमिंदर लूथरा का इसकी कमान सौंपी गई है। भास्कर से पहले सन 2005 तक नवभारत छिंदवाड़ा में नंबर वन अखबार हुआ करता था। गौरतलब है कि इससे पहले लोकमत समूह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा समेत चार सीमावर्ती जिलों बालाघाट, सिवनी और बैतूल के पाठकों के लिए मध्यांचल संस्करण के द्वारा अपनी पहुंच बना चुका है।

वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र जायसवाल
जिले में अपना ब्यूरो कार्यालय बनाने वाले पहला अखबार लोकमत ही था, जो 1989 में स्‍थापित किया गया था। तब से लगातार यह अखबार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। जिले के संतराचल यानी रामाकोना, सौंसर, पांढुर्णा में इसकी अच्छी पकड़ रही है। आरंभ से लोकमत समाचार से जुड़े और फिलहाल इसके ब्यूरो चीफ वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र जायसवाल ने कहा कि यह अखबार लोगों की बीच अपनी पकड़ बनाने में कामयाब हो रहा है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पत्रकार शिवनारायण शर्मा और कमल नयन 'पंकज' जी ने शुरूआत में इसके ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली। मैंने भी अपने पत्रकारिता कॅरियर की शुरूआत 2003 में लोकमत से ही की थी।

दैनिक भास्कर का 43 वां एडीशन छिंदवाड़ा में साल 2008 में लांच हुआ। इसके संपादक मनमोहन अग्रवाल और लांचिग टीम में प्रमुख थे विकास मिश्र और संजय गौतम। गौतम जी फिलहाल यहां संपादक है। छिंदवाड़ा एडीशन पहले भास्कर के भोपाल ग्रुप के पास था। बंटवारे के बाद यह जबलपुर भास्कर के हाथ में चला गया। फिलहाल जिले में इसकी 33 हजार प्रतियां पहुंच रही है। दैनिक भास्कर की लांचिग टीम का हिस्सा रहे वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र इन दिनों लोकमत नागपुर के संपादक है। अब उन्हीं की अगुवाई में लोकमत का एडीशन शुरू हुआ है।

छिंदवाड़ा में फिलहाल दैनिक भास्कर, जबलपुर एक्सप्रेस जैसे अखबारों का बोलबाला है। जल्द ही यहां से राजस्‍थान पत्रिका के एडीशन शुरू होने की चर्चा है। भास्कर की बात करें तो मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई शहरों की तरह यहां भी यह अखबार लोगों की पहली पसंद बन गया है, लेकिन लोकल खबरों को ज्यादा स्पेस देने की वजह से जबलपुर एक्सप्रेस की भी अपनी पहचान है। इसके अलावा  नवभारत, सतपुड़ा एक्सप्रेस, राज एक्सप्रेस, नई दुनिया, देशबंधु, जनपक्ष जैसे अखबार भी मार्केट में है।

सालों तक पाठकों की पहली पसंद रहा नवभारत नागपुर
अगर अतीत बात की जाए तो नवभारत नागपुर ने यहां अपना स्वर्णिम दौर देखा है। 90 के दशक में नवभारत अपने प्रतिद्वंदी अखबारों जबलपुर एक्सप्रेस, लोकमत, जनपक्ष और स्वतंत्र मत के बीच पाठकों की पहली पसंद रहा। आजादी के पूर्व सन 1937 में नवभारत शुरू हुआ था। तब से नवभारत यहां रेगुलर आता रहा है। इसके संस्‍थापक स्‍व. रामगोपाल माहेश्वरी उर्फ बाबूजी साल में कई बार छिंदवाड़ा आते थे। उमरानाला के वरिष्ठ पत्रकार विट्ठल पटेल ने बताया कि वे 1956 से 2002 तक नवभारत से जुड़े रहे। वे मोहखेड़ और बिछुआ ब्लॉक की खबरें भेजा करते थे। उन्होंने बताया कि माहेश्वरी जी जब भी छिंदवाड़ा आते थे, तो उमरानाला रूककर यहां के मशहूर बड़े जरूर खाया करते थे। उन्हें बड़े बहुत ज्यादा पसंद थे।

1984 में बेस्ट रिपोर्टिंग के अवार्ड से नवाजे गए वरिष्ठ पत्रकार गुणेंद्र दुबे बताते है कि नागपुर से नवभारत अखबार बस-टैक्सी से उसी दिन आ जाता था। जबकि बाकी कई राष्ट्रीय अखबार और मैग्जीन ट्रेन के द्वारा दूसरे दिन पहुंचती थी, जिनमें हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, आज, टाइम्स ऑफ इंडिया और हैदराबाद से प्रकाशित मैग्जीन 'कल्पना' शामिल थी।

आपको याद दिला दे कि 20 वीं सदी के आखिरी दशक में भोपाल और जबलपुर से प्रकाशित दैनिक भास्कर भी छिंदवाड़ा पहुंचने लगा। जबलपुर एक्सप्रेस यहां से 1991 में लांच हुआ था। 21 वीं सदी के पहले दशक यानी 2000-2010 में कई अखबारों के एडीशन शुरू हुए। 13 फरवरी, 2000 में भोपाल से प्रकाशित दैनिक भास्कर में छिंदवाड़ा के चार पेज निकलना शुरू हुए। इसके बाद 22 मार्च, 2000 को नवभारत का एडीशन शुरू हुआ। जिसका बड़ा-सा आफिस शनिचरा बाजार में बनाया गया। करीब चार-पांच साल में ही इसका दौर लगभग खत्म-सा हो गया।

देखा जाए तो दैनिक भास्कर के आने के पहले तक नवभारत और जबलपुर एक्सप्रेस के अलावा लोकमत अपने मध्यांचल जैसे कुछ पन्नों के पुलआउट के साथ छिंदवाड़ा की जनता के काफी लोकप्रिय रहे हैं। बचपन में हम लोग छिंदवाड़ा-नागपुर रोड पर स्थित उमरानाला, तंसरामाल जैसे कस्बों में नवभारत नागपुर, जबलपुर एक्सप्रेस, नई दुनिया और लोकमत जैसे अखबारों  को ही तलाशा करते थे। इनके परिशिष्ट और वीकली मैग्जीन भी खासी पढ़ी जाती थी। इसमें नवभारत की ग्‍लैमर, सुरुचि, अवकाश और लोकमत की लोकरंग, सखी, मंथन आदि शामिल थी।

जनसंपर्क विभाग में कार्यरत साहित्यकार ओमप्रकाश नयन ने बताया कि 90 के दशक में नवभारत के अलावा जबलपुर से प्रकाशित नवीन दुनिया, देशबंधु भी यहां पढ़े जाते थे। उमरानाला कस्बे में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबारों की बात करें तो 1980-82 के आसपास से ही यहां नवभारत नागपुर और नई दुनिया इंदौर खासे चर्चित रहे। जानकार बताते हैं कि उमरानाला में उस जमाने में नवभारत की करीब 150 और नई दुनिया इंदौर की 25 कॉपियां आती थी।

लोकमत का साहित्य से रहा है गहरा नाता
साहित्यकारों के बीच में लोकमत समाचार काफी पहले से भी लोकप्रिय रहा है। कई साहित्यकारों को लोकमत से नई पहचान मिलीं। बाबा हनुमंत मनगटे को पहली बार मैंने लोकमत में ही पढ़ा था। उसके बाद उनसे मिलने काव्या दूरसंचार, बुधवारी बाजार में पहुंचा था। छिंदवाड़ा के कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले यानी यहां रहने से पहले तक मैंने साहित्य बिरादरी के कम ही लोगों के बारे में सुना था। लोकमत समाचार के साहित्य से जुड़ाव का ही परिणाम रहा कि जब छिंदवाड़ा से लोकमत का शुभारंभ हुआ तो इस मौके पर निकले लोकार्पण विशेष में साहित्य को खासी तवज्जो मिली।

स्पेशल पेज पर वरिष्ठ साहित्यकार बाबा हनुमंत मनगटे का लेख ''आजादी बाद छिंदवाड़ा की साहित्यिक यात्रा '' का प्रकाशन हुआ। साथ ही वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई का लेख भी प्रकाशित हुआ, जो छिंदवाड़ा के उन साहित्यकारों पर है ,जो बाहर रहकर अपना सृजनकर्म कर रहे हैं।  इसके अलावा तस्वीरों में- जनवरी 1978 में आयोजित सातवें अखिल भारतीय समांतर कथा लेखक सम्मेलन जिसमें सर्वश्री कमलेश्वर,जितेन्द्र भाटिया,मधुकर सिंह, धूमकेतु, सुभाष पन्त, ओम गोस्वामी, धीरेन्द्र अस्थाना, आलमशाह खान, राजेन्द्र दानी, असगर अली इंजीनियर, दामोदर सदन ,मनीष राय, दया पवार, सतीश कालसेकर, सूर्यभान रणशुम्भे, शौरी राजन और अन्य साहित्यकारों ने शिरकत की थी, इस कार्यक्रम का संयोजन हनुमंत मनगटे ने किया था। दूसरी तस्वीर - म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन, छिंदवाड़ा के एक वार्षिक कार्यक्रम की, छपी है। 

दैविक चाणक्य के संपादक रहे पुण्य प्रसुन वाजपेयी
छिंदवाड़ा में पहला दैनिक अखबार मई 1991 में सनत जैन के संपादन में 'जबलपुर एक्सप्रेस' निकला। वहीं अक्टूबर, 1993 में राजू अरोरा ने दैविक चाणक्य प्रकाशित किया। करीब दो साल तक इसके संपादक थे, आज के मशहूर टेलीविजन पत्रकार, संपादक और सीनियर एंकर पुण्य प्रसुन वाजपेयी। उनके साथी रहे वरिष्ठ पत्रकार कमल नयन 'पंकज' ने बताया कि पुण्य प्रसुन जी उस समय नागपुर में रहा करते थे और लोकमत नागपुर की नौकरी छोड़कर दैविक चाणक्य में आए थे।

छिंदवाड़ा का पहला हिंदी अखबार मध्यप्रांत समाचार पं. गोपीनाथ दीक्षित के संपादन में सन 1921 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद सन 1949 को चार पेज का 'साप्ताहिक इंकलाब' प्रकाशित हुआ। इसके संपादक स्‍व. आर. के. हलदुलकर जी थे। पचास से साठ के दशक के बीच रवि दुबे जी के संपादन में सतपुड़ा टाइम्स प्रकाशित हुआ था। इसी समय 'साप्ताहिक जनसेवक' का भी प्रकाशन हुआ था। इसमें साहित्यकार और पत्रकार पं. रामकुमार शर्मा का एक चर्चित कॉलम छपता था।

एक और साप्ताहिक अखबार 'सतपुड़ा के स्वर' भी चर्चा में रहा। इसका प्रकाशन सन 1968 में हुआ, जिसके संपादक थे स्‍व. शैलेंद्र शुक्ला। जिले के वरिष्ठ साहित्यकार स्‍व. बाबा संपतराव धरणीधर ने 1976 में हाशिया नामक समाचार पत्र निकाला था। होली के अवसर पर 1989 से लगातार संतोष जैन 'सरल' हास्य-व्यंग्य पर आधारित वार्षिक बुलेटिन 'हरामखाऊ टाइम्स' निकालते हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार इसकी दो हजार कॉपियां निकली थी। वहीं 2013 में 20 हजार प्रतियां छपी। एक सांध्य दैनिक 'हिंदी हेराल्ड' की भी चर्चा होती है। नवंबर 1996 में प्रकाशित इस समाचार पत्र का संपादन रजत गुप्ता ने किया था। जनवरी, 2010 में विश्वेश चंदेल ने साप्ताहिक मैग्जीन 'किसान अभिकल्पना' निकाली।

छिंदवाड़ा की नई और पुरानी पत्रकार पीढ़ी
छिंदवाड़ा के पत्रकारों की पुरानी पीढ़ी में स्‍व. आर. के हलदुलकर, स्‍व. शैलेंद्र शुक्ला, स्‍व. शिवप्रसाद साहू, स्‍व. प्रकाश पण्डया, स्व. रविंद्र सिंह शक्रवार, नरेंद्र जायसवाल, कैलाश पाटनी, शिवनारायण शर्मा, के. के. हलदुलकर, रवि दुबे, रघुराज पारिख, गोविंद चौरसिया, आर. एस. वर्मा, वनराज जडेजा, गुणेंद्र दुबे, राजेंद्र राही, महेश चांडक, राकेश प्रजापति, सुंदर सिंह शक्रवार आदि का नाम शुमार है।

वर्तमान पीढ़ी के पत्रकारों में रवि वर्मा उजाला, धर्मेंद्र जायसवाल, रत्नेश जैन, सुधीर दुबे, हर्षित दुबे, गिरीश लालवानी, जगदीश पवार, दिनेश लिखितकर, दीप्ति शुक्ला, राजेश करमेले, संतोष गौतम, सचिन श्रीवास्तव, अंशुल जैन जैसे दर्जनों नाम शामिल है।

जिले से बाहर सक्रिय पत्रकारों की श्रेणी में प्रिंट मीडिया से नवभारत टाइम्स दिल्ली के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्‍णु खरे, आरती पांडे, नेहा घई पंडित, सुमित वर्मा, रामकृष्‍ण डोंगरे, निश्चय बोनिया आदि शामिल है। वहीं टेलीविजन जर्नलिस्ट की लिस्ट में सीनियर एंकर दिनेश गौतम, अमिताभ अरुण दुबे, धर्मेंद्र रघुवंशी, आशीष मिश्रा, शैलेंद्र सिंह, इमरान खान, प्रशांत नेमा, अरुण खोबरे, मनीष शेंडे, हरीश देशमुख आदि नाम है।  

- रामकृष्‍ण डोंगरे

मीडिया वेबसाइट भड़ास4मीडिया से साभार

बुधवार, 24 जुलाई 2013

प्रभु नारायण नेमा की यादों में 80 के दशक का मीडिया

वास्तव में 80 के दशक में प्रिंट मीडिया और उनसे जुड़े मित्रों की आज भी याद है। मैं उस समय (1983) सतपुड़ा विधि महाविद्यालय में छात्रसंघ का अध्यक्ष था और प्रेस में समाचार भी मजेदार होते थे। नवभारत में आधा पेज ही छिंदवाड़ा जिले के लिए होता था। शहर के एक या दो समाचार होते थे। बाकी नईदुनिया इंदौर श्री कैलाश पटनी जी, नव भारत नागपुर श्री नरेन्द्र जैसवाल जी, देशबंधु वनराज जडेजा जी, महेश चांडक जी दैनिक जागरण सहित साप्ताहिक समाचार जनपक्ष, सतपुड़ा के स्वर, इन्कलाब सहित समाचार पत्र थे।

खास बात ये थी कि उस समय आप का समाचार छपना बहुत बड़ी चीज थी। हां, प्रेस विज्ञप्ति मित्रों के पास ले जाते थे। वे उस समाचार को प्रेस के समाचार पैड पर फिर से हाथ से लिखते थे और लिफाफा डाक से पोस्ट होता था, जो कि 4 या 5 दिन में कम से कम समाचार पत्र के दफ्तर में जबलपुर, इंदौर, नागपुर, भोपाल में पहुचता था। समाचार कम से कम एक हफ्ते में पढ़ पाते थे और वो ख़ुशी आज भी याद है जब रोक कर मित्र कहते थे आज तुम्हारा संचार आया है।

उस समय समाचार टेलीग्राम से भी जाते रहे पर इसके लिए खास मशक्कत करनी होती थी। प्रेस कार्ड का जलवा भी था, मैं भी प्रभावित हो मालवा समाचार साप्ताहिक का उस समय जिला प्रतिनिधि बन गया। वो भी दिन थे पर दैनिक संस्करण की शुरुआत जबलपुर एक्सप्रेस से हुई और रत्नेश जैन जी उस समय तरुनाई में थे। श्री आर एस वर्मा जी की शुरुआत भी जहां तक वहीं से थी। आज मीडिया के बढ़ते कदम छिंदवाडा शहर को बड़े शहरों की पहचान दे रहा है।

 (लेखक प्रभु नारायण नेमा मध्य प्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन (इंटक), छिंदवाड़ा (मप्र) के प्रांतीय उपाध्यक्ष है। इसके अलावा वे 'नेमा दर्पण' के संपादक भी है।)

शनिवार, 13 जुलाई 2013

लोकमत समाचार के 7वें संस्करण का छिंदवाड़ा में लोकार्पण

 शुक्रवार को छिंदवाड़ा में आयोजित भव्य समारोह में 'लोकमत समाचार' के छिंदवाड़ा संस्करण का लोकार्पण हुआ. इस मौके पर 'लोकमत समाचार' के
संपादक विकास मिश्र, लोकमत पत्र समूह के संयुक्त प्रबंध संचालक ऋषि दर्डा, आईबीएन 7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष, लोकमत पत्र समूह के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ सांसद विजय दर्डा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ, राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता रविशंकर प्रसाद, महाराष्ट्र के शालेय शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा, 'आज तक' के कार्यकारी संपादक पुण्यप्रसून वाजपेयी, लोकमत पत्र समूह के कार्यकारी संचालक करण दर्डा तथा छिंदवाड़ा संस्करण के स्थानीय संपादक देवेश ठाकुर मौजूद थे.

छिंदवाड़ा की अपनी दुनिया है. भोपाल छिंदवाड़ा नहीं बन सकता, लेकिन छिंदवाड़ा भोपाल बन सकता है. - कमलनाथ, केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री

लक्ष्य से दूर न हो मीडिया और राजनीति

'आम आदमी के विकास में राजनीति और मीडिया की भूमिका' पर वक्ताओं के उद्गार

छिंदवाड़ा। 12 जुलाई (लोस टीम)
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं,
कभी महक की तरह फूलों से उड़ते हैं,
कैंचियां हमें उड़ने से खाक रोकेंगी,
हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं.

ऐसे ही कुछ हौसलों के साथ लोकमत समाचार के 7वें संस्करण का लोकार्पण आज छिंदवाड़ा से किया गया. लोकमत पत्र समूह ने अपने इस 21वें संस्करण के साथ मध्यप्रदेश में पदार्पण किया. इस अवसर पर आयोजित 'आम आदमी के विकास में राजनीति और मीडिया की भूमिका' पर विचारोत्तेजक परिसंवाद में अतिथियों ने अपने उद्गार व्यक्त किए. अतिथियों का मत था कि मीडिया और राजनीति आम आदमी के विकास के अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं. मीडिया और राजनीति को आम आदमी पर केंद्रित रहना चाहिए क्योंकि वही उनका लक्ष्य है.

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि छिंदवाड़ा की अपनी दुनिया है. भोपाल छिंदवाड़ा नहीं बन सकता, लेकिन छिंदवाड़ा भोपाल बन सकता है. छिंदवाड़ा आज वह नहीं रहा जो 80 के दशक में हुआ करता था. यहां के लोगों ने अपनी सोच बदली है. वे विकास के मायने जानते हैं. उक्त विचार केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रकट करते हुए कहा कि तकनीकी बदलाव को उपलब्धि नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह तो विज्ञान की देन है. उपलब्धि तो वह है जिससे शहर का विकास हो, परिवर्तन हो. यह तभी संभव है जब आम आदमी अपनी सोच बदलेगा. मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा से लोकमत समाचार के पदार्पण को सही वक्त पर उठाया गया उचित कदम बताते हुए कमलनाथ ने लोकमत पत्र समूह को बधाई दी.

पंकज टॉकीज में आयोजित भव्य लोकार्पण समारोह में लोकमत समाचार के छिंदवाड़ा संस्करण का विमोचन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ, राज्यसभा में विपक्ष के नेता रविशंकर प्रसाद, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, लोकमत पत्र समूह के चेयरमैन एवं एडिटर इन चीफ सांसद विजय दर्डा, महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा, आज तक के कार्यकारी संपादक पुण्यप्रसून वाजपेयी तथा आईबीएन 7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष की उपस्थिति में हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत आकर्षक गणेश वंदना के साथ की गई. इसके पश्‍चात अतिथियों ने दीप प्रज्‍जवलन किया. लोकार्पण के अवसर पर लोकमत समाचार के संपादकीय संचालक एवं संयुक्त प्रबंध संचालक ऋषि दर्डा, कार्यकारी संचालक करण दर्डा, संपादक विकास मिश्र, प्रोडक्ट हेड मतीन खान, स्थानीय संपादक देवेश ठाकुर सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित थे.

निष्पक्ष रहे मीडिया : पृथ्वीराज चव्हाण
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने लोकमत परिवार को महाराष्ट्र की जनता की ओर से बधाई देते हुए कहा कि राजनीति लोगों को समाज में समानता का दर्जा दिलाने में हरसंभव कोशिश कर रही है. मीडिया इस कार्य में एक सेतु के रूप में अपनी भूमिका अदा कर रहा है. इस कार्य में मीडिया और राजनीति दोनों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी है. उन्होंने राजनीति के साथ-साथ मीडिया में भी दुगरुणों का जिक्र किया. चव्हाण ने कहा कि पाठक या दर्शक संख्या बढ़ाने के लिए मीडिया में विषयवस्तु का स्तर गिर रहा है जिसे बनाए रखने की जरू रत है. कॉर्पोरेट के चलते परिदृश्य बदला है, लेकिन फिर भी मीडिया को निष्पक्ष रहने की जरूरत है. हालांकि उन्होंने इस दौरान मीडिया में सकारात्मक प्रस्तुति की सराहना भी की. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के हर पहलू चाहे व सही हों या गलत, इसे लोगों तक पहुंचाने की जवाबदेही मीडिया की है.

देश को लेकर आमजन निराश नहीं : रविशंकर प्रसाद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता तथा भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लोकमत तभी प्रासंगिक बनेगा जब वह जनमत से जुडे.गा. उनका मानना है कि मीडिया के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी आम जनता से जुड.ना होगा. यदि आम आदमी से जुड़ाव नहीं होगा तो कोई भी राजनेता या समाचार पत्र सफल नहीं हो सकता. मीडिया जब तक लोगों की पीड़ा, वेदना, उत्कंठा को नहीं समझेगा तब तक वह आमजन में अपनी पैठ नहीं बना सकता. उन्होंने कहा कि देश का जन हमें समझ रहा है. अब सवाल यह है कि हम देश के जन को कितना समझ रहे हैं. देश का जन मीडिया को भी समझ रहा है. आज पेड न्यूज मीडिया के लिए अभिशाप है. संपादक भी बिकता है. देश को लेकर मीडिया तथा राजनेता दोनों निराश हैं, लेकिन आमजन निराश नहीं है. उन्होंने कहा कि मुझे हर जगह आशा की किरण दिखाई देती है. चाहे वह किसान हो, मजदूर हो या फिर देश का नौजवान हो. ये सदैव आशान्वित होकर कार्य करते हैं. इन्हें देश से कोई मतलब नहीं होता है. उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र है और हमें जमकर आलोचना करनी चाहिए.

दो दशक से आया बदलाव : राजेंद्र दर्डा
महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा ने कहा कि राजनीति और मीडिया में पिछले दो दशकों से बदलाव आया है. आजादी के पहले भारत में राजनीति और मीडिया का सामंजस्य इतिहास में दर्ज है, जो अब दिखाई नहीं देता. मीडिया जनहित का संरक्षक है. घटना का साक्षी होता है. मीडिया को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनेता मीडिया के लिए रॉ मटेरियल होता है, और होना भी चाहिए. मीडिया में हमेशा राजनीति को लेकर बहस चलती रहती है.

देना होगा हिन्दी को महत्व : विजय दर्डा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकमत मीडिया प्रा. लि. के एडिटर-इन-चीफ विजय दर्डा ने कहा कि मीडिया की प्रमुख भूमिका, लोगों के जीवन में सुधार लाना है. देश को जोड.ना है तो हमें हिन्दी को महत्व देना होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश के पहले संस्करण का लोकार्पण छिंदवाड़ा से किया गया है. उन्होंने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है जब मीडिया निष्पक्ष होकर कार्य करे. लोकमत हमेशा से किसी पार्टी विशेष का अखबार नहीं रहा है. यह निष्पक्ष होकर काम करता है. उन्होंने कहा कि लोकमत आपकी बात राजनेताओं तक पहुंचाने का एक प्लेटफार्म है. आप इस पत्र के माध्यम से अपनी बात खुलकर रख सकते हैं. उन्होंने छिंदवाड़ा से भव्य लोकार्पण पर सभी छिंदवाड़ावासियों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया.

मीडिया व राजनीति को आना होगा आगे : आशुतोष
परिसंवाद के दौरान आईबीएन-7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने कहा कि 1950 के बाद देश में तेजी के साथ बदलाव आया है. यह सिर्फ टेक्नालॉजी की बदौलत नहीं बल्कि लोगों की सोच के कारण संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि भारतीय समाज परिपक्व हो गया है. आमजन को पता है कि कौन सही है, कौन गलत. मीडिया और राजनीति बदलते समाज के हिसाब से अब भी बहुत पीछे हैं. आज जरूरत है कि मीडिया और राजनीति दोनों आम लोगों को समझें कि आखिर वे क्या चाहते हैं. उन्होंने पेड न्यूज के संबंध में कहा कि मीडिया में आए दिन पेड न्यूज के बारे में सवाल खड़े होते हैं. इसके लिए पेड न्यूजदाता भी जिम्मेदार हैं.

आम आदमी से नहीं है जुड़ाव : पुण्यप्रसून वाजपेयी
परिसंवाद में 'आज तक' के कार्यकारी संपादक पुण्यप्रसून वाजपेयी ने कहा कि छिंदवाड़ा की अपनी दुनिया है. आज सरोकार की राजनीति खत्म हो चुकी है. राजनेताओं का आम आदमी से जुड़ाव नहीं रहा है. हमेशा से आम आदमी का उपयोग राजनेता करते आए हैं.

साभार- लोकमत समाचार

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

लोकमत समाचार का मध्यप्रदेश से पहला संस्करण आज से

छिंदवाड़ा। 11 जुलाई, 2013। लोकमत समूह के हिंदी दैनिक लोकमत समाचार का सातवां और मध्य प्रदेश से पहला संस्करण 12 जुलाई को छिंदवाड़ा से शुरू हो रहा है. इस अवसर पर 'आम आदमी के विकास में राजनीति और मीडिया की भूमिका' विषय पर विचारोत्तेजक परिसंवाद का भी आयोजन किया गया है. इसमें राजनीति एवं मीडिया जगत के अनेक दिग्गज शिरकत करेंगे.

स्थानीय पंकज टॉकीज में सुबह 11 बजे आयोजित लोकार्पण समारोह में क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता रविशंकर प्रसाद, राज्यसभा सदस्य एवं लोकमत मीडिया प्रा. लि. के चेयरमैन तथा एडिटर इन चीफ विजय दर्डा, महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा, आईबीएन 7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष, आज तक के कार्यकारी संपादक पुण्यप्रसून बाजपेयी उपस्थित रहेंगे. वे परिसंवाद में भी हिस्सा लेंगे.


लोकमत समाचार का प्रकाशन अभी नागपुर, औरंगाबाद, अकोला, जलगांव, कोल्हापुर तथा पुणे से हो रहा है. महाराष्ट्र के बाहर लोकमत समाचार का यह पहला कदम है. लोकमत समाचार महाराष्ट्र का नंबर-वन हिंदी दैनिक है और देश के कई दिग्गज लेखक इससे जुडे हुए हैं. देश भर में लोकमत समाचार के रिपोर्टर तैनात हैं ताकि पल-पल की खबर को पाठकों तक पूरी सचाई के साथ प्रस्तुत किया जा सके. लोकमत समाचार निश्‍चय ही छिंदवाड़ा की आवाज बनकर उभरेगा और मध्य प्रदेश की पत्रकारिता में नए आयाम स्थापित करेगा.
    
साभार- लोकमत समाचार